बिहार में नई सरकार के गठन और शपथ ग्रहण समारोह के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राजद (RJD) ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण कार्यक्रम को “भाजपामय” बताते हुए एनडीए की जीत पर सीधे सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि यह जीत न तो जनसमर्थन का परिणाम है और न ही स्वाभाविक राजनीतिक परिस्थिति का, बल्कि “पूरी तरह से मैनेज्ड” प्रयास का नतीजा है।
गमछा राजनीति पर RJD का व्यंग्य
राजद प्रवक्ताओं ने कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गमछा लहराए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अगर तेजस्वी यादव अपनी सभाओं में गमछा लहराते थे, तो उसे “रंगदारों की पहचान” कहा जाता था, लेकिन जब प्रधानमंत्री मोदी वही गमछा लहराते हैं, तो उसे अचानक “बिहारी संस्कृति” का प्रतीक बताया जाने लगता है।
RJD का कहना है कि यह दोहरा रवैया न सिर्फ राजनीतिक पाखंड को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सत्तापक्ष किस तरह सांस्कृतिक प्रतीकों का राजनीतिक इस्तेमाल करता है।
एनडीए पर परिवारवाद का आरोप
RJD ने एनडीए पर परिवारवाद का भी आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि एनडीए हमेशा परिवारवाद के खिलाफ आवाज़ उठाती रही है, लेकिन मंत्री पदों की घोषणा ने खुद उनकी ही बातों को गलत साबित कर दिया है।
राजद का कहना है कि संतोष कुमार सुमन, दीपक प्रकाश और संजय पासवान को मंत्रिमंडल में शामिल करके एनडीए ने साबित कर दिया है कि वे भी परिवारवाद से मुक्त नहीं हैं। RJD का आरोप है कि मंत्रिमंडल गठन में योग्यता से ज्यादा राजनीतिक समीकरण और पारिवारिक पहचान को प्राथमिकता दी गई है।
JDU का पलटवार—”डबल इंजन सरकार से होगा बिहार का विकास”
इन आरोपों के बीच जदयू (JDU) ने कहा कि गठबंधन की यह सरकार बिहार को तेजी से विकसित प्रदेश बनाने का संकल्प रखती है। पार्टी का दावा है कि नई सरकार युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, रोजगार के अवसर विकसित करने और राज्य की बुनियादी संरचना को मजबूत करने पर जोर देगी।
जदयू के अनुसार, राजद की आलोचना केवल राजनीतिक हताशा का परिणाम है, क्योंकि जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया है।
शपथ ग्रहण समारोह पर राजनीति क्यों गर्म हुई?
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री, भाजपा नेताओं और गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने इसे एक बड़े राजनीतिक संदेश में बदल दिया। राजद का कहना है कि यह कार्यक्रम निष्पक्ष सरकारी आयोजन से ज्यादा BJP के राजनीतिक प्रदर्शन जैसा दिखा।
गमछा, नारों और प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर उठी बहस ने समारोह को एक नए विवाद की ओर धकेल दिया है, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।
चुनाव परिणाम के बाद भी शांत नहीं बिहार की राजनीति
एनडीए की सरकार बनने के बाद भी बिहार की राजनीति लगातार गर्माई हुई है। RJD जहां सत्ता पक्ष को मैनेजमेंट, सांस्कृतिक दोहरापन और परिवारवाद के आरोपों में घेर रहा है, वहीं JDU और भाजपा दावा कर रहे हैं कि बिहार अब विकास की नई राह पर आगे बढ़ेगा।
यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में भी दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक टकराव जारी रहेगा, और बिहार की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में बनी रहेगी।

