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प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र की तैयारियों पर उठाए सवाल

LPG Crisis: ईरान-इजरायल तनाव के बीच LPG संकट? प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र की तैयारियों पर उठाए सवाल

LPG Crisis: ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच भारत के कुछ हिस्सों में एलपीजी गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। इसी मुद्दे को लेकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की राज्यसभा सांसद Priyanka Chaturvedi ने केंद्र सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एलपीजी की संभावित कमी का असर आम जनता पर दिखाई देने लगा है और सरकार को स्थिति से निपटने के लिए अधिक ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

LPG संकट और गैस की कमी पर प्रियंका चतुर्वेदी का बयान

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि एलपीजी की समस्या का सीधा असर आम लोगों के साथ-साथ छोटे व्यवसायों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार पूरी तरह से विफल नहीं कही जा सकती, लेकिन हालात चिंताजनक जरूर हैं। उनके अनुसार अगर गैस की आपूर्ति में बाधा आती है तो होटल, ढाबे और छोटे-मोटे कारोबार प्रभावित होंगे। इससे रोजगार पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है और कई लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले समय में पेट्रोल और गैस की उपलब्धता आम जनता के लिए बड़ी समस्या बन सकती है।

अंतरराष्ट्रीय तनाव और भारत की कूटनीतिक भूमिका

सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि भारत को इस अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान अपनी कूटनीतिक भूमिका मजबूत करनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को अमेरिका और इजरायल जैसे देशों के साथ बातचीत कर स्थिति को शांत करने की दिशा में दबाव बनाना चाहिए। उनके मुताबिक अगर मध्य-पूर्व में संघर्ष बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा और भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों को आर्थिक और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

सोशल मीडिया पर सरकार की तैयारी पर सवाल

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार की तैयारी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि शांतिपूर्ण समय में अक्सर यह कहा जाता है कि देश हर प्रकार के संकट और व्यवधान से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन जब वास्तविक संकट आता है तो स्थिति अलग दिखाई देती है। उनके अनुसार युद्ध जैसी परिस्थितियों में यह कहना कि मदद नहीं की जा सकती, उन दावों को कमजोर करता है जो पहले किए गए थे।

डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और कूटनीतिक घटनाक्रम

प्रियंका चतुर्वेदी ने अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump लगातार ईरान को लेकर चेतावनी देते रहे थे। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध शुरू होने से दो दिन पहले ही भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इजरायल का दौरा किया था। इसके बावजूद मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि भारत सरकार रणनीतिक तैयारी के मामले में पर्याप्त रूप से सतर्क नहीं थी।

LPG और पेट्रोलियम भंडार पर केंद्र सरकार का जवाब

दूसरी ओर केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर संसद में स्थिति स्पष्ट की है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री Suresh Gopi ने राज्यसभा में लिखित उत्तर देते हुए बताया कि सरकार ने 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाली रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार सुविधाएं स्थापित की हैं। ये भंडार भू-राजनीतिक संघर्ष या आपूर्ति संकट जैसी स्थितियों में एक बफर के रूप में काम कर सकते हैं। उनके अनुसार यह भंडार लगभग 9.5 दिनों की कच्चे तेल की आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम है।

रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और ऊर्जा सुरक्षा

सरकार के मुताबिक देश में तेल विपणन कंपनियों के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का लगभग 64.5 दिनों का अतिरिक्त भंडारण मौजूद है। यदि इसे रणनीतिक भंडार के साथ जोड़ दिया जाए, तो भारत के पास कुल मिलाकर करीब 74 दिनों तक की ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने की क्षमता है। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था संभावित आपूर्ति संकट के दौरान देश की ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि वैश्विक संघर्ष के बढ़ते जोखिम को देखते हुए ऊर्जा सुरक्षा और गैस आपूर्ति को लेकर और मजबूत रणनीति की जरूरत है।

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