LPG Crisis in Mumbai: महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई इस समय एक गंभीर एलपीजी संकट का सामना कर रही है। गैस की कमी ने सबसे ज्यादा प्रभावित होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को किया है। ईंधन की उपलब्धता कम होने के कारण शहर के लगभग 20 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट अस्थायी रूप से बंद हो चुके हैं। ‘आहार’ (एसोसिएशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट) ने चेतावनी दी है कि यदि अगले तीन दिनों के भीतर एलपीजी की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो आधे से अधिक होटल और भोजनालयों को अपने शटर गिराने पड़ सकते हैं। इससे न केवल कारोबार प्रभावित होगा बल्कि हजारों कर्मचारियों की आजीविका भी खतरे में पड़ सकती है।
घनी आबादी वाले इलाकों में गैस की कमी
मुंबई के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में एलपीजी की कमी का असर और अधिक स्पष्ट दिखाई दे रहा है। डोंगरी जैसे इलाकों में कई छोटे और मध्यम स्तर के रेस्टोरेंट पहले ही बंद हो चुके हैं। होटल मालिकों का कहना है कि महानगर में जगह की कमी के कारण वे अधिक संख्या में गैस सिलेंडर स्टोर नहीं कर पाते। ऐसे में अचानक पैदा हुआ यह एलपीजी संकट उनके लिए गंभीर चुनौती बन गया है। कई होटलों में केवल कुछ घंटों के लिए ही गैस बची है, जिसके खत्म होते ही उन्हें अपनी सेवाएं पूरी तरह बंद करनी पड़ सकती हैं।
होटल संगठनों की सरकार से अपील
एलपीजी की कमी से जूझ रहे होटल और रेस्टोरेंट मालिक अब सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। होटल संगठनों का एक प्रतिनिधिमंडल संबंधित मंत्री से मुलाकात करने की तैयारी कर रहा है। उनका उद्देश्य सरकार को इस संकट की गंभीरता से अवगत कराना और एलपीजी की आपूर्ति जल्द से जल्द सामान्य कराने की मांग करना है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो मुंबई के खाद्य व्यवसाय पर “टोटल शटडाउन” का खतरा मंडराने लगेगा।
अंतरराष्ट्रीय तनाव से बढ़ा एलपीजी संकट
मुंबई में एलपीजी संकट के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध और तनाव ने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है। खाड़ी देशों से होने वाली आपूर्ति में बाधा आने के कारण भारत की रिफाइनरियों पर दबाव बढ़ गया है। कच्चे माल की कमी और परिवहन में देरी के चलते घरेलू और कमर्शियल दोनों क्षेत्रों में एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता में गिरावट दर्ज की गई है। यही कारण है कि मुंबई जैसे बड़े शहर में गैस की कमी अब साफ तौर पर दिखाई देने लगी है।
केंद्र सरकार की कार्रवाई
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने तत्काल कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार ने सभी तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे अन्य उत्पादों की तुलना में एलपीजी का उत्पादन बढ़ाएं। इस अतिरिक्त उत्पादन का उपयोग मुख्य रूप से घरेलू और अनिवार्य सेवाओं के लिए किया जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम घरों में रसोई गैस की आपूर्ति बाधित न हो। रिफाइनरियों को तकनीकी क्षमता बढ़ाकर एलपीजी उत्पादन तेज करने और कमी को जल्द से जल्द दूर करने के लिए युद्ध स्तर पर काम करने को कहा गया है।
ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए 25 दिन का इंटर-बुकिंग नियम
गैस की कमी के दौरान जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग की आशंका को देखते हुए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। मंत्रालय ने एलपीजी सिलेंडर की ‘इंटर-बुकिंग पीरियड’ को बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है। इसका मतलब है कि एक सिलेंडर बुक करने के बाद उपभोक्ता अगले 25 दिनों तक दूसरा सिलेंडर बुक नहीं कर सकेगा। यह नियम घरेलू और कमर्शियल दोनों श्रेणियों पर लागू किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से सिलेंडरों के अनावश्यक भंडारण पर रोक लगेगी और उपलब्ध स्टॉक का समान वितरण संभव होगा, जिससे अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को कम से कम एक सिलेंडर उपलब्ध कराया जा सकेगा।

