Middle East Crisis: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते सैन्य तनाव और इजराइल-ईरान संघर्ष के बीच भारत की आंतरिक राजनीति गर्मा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने नरेंद्र मोदी सरकार की कूटनीतिक सक्रियता पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों का सही उपयोग करने के बजाय केवल दिखावे की कूटनीति कर रही है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर कोई ठोस प्रभाव नहीं पड़ रहा है।
ब्रिक्स प्लस (BRICS+) शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक तीखी पोस्ट साझा करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के अंत में नई दिल्ली में 18वां वार्षिक ब्रिक्स प्लस (BRICS+) शिखर सम्मेलन आयोजित होना है। इस समूह में ईरान, सऊदी अरब, मिस्र और यूएई जैसे प्रभावशाली देश शामिल हैं। कांग्रेस नेता का तर्क है कि भारत को इस मंच का उपयोग पश्चिम एशिया के संकट को सुलझाने के लिए एक बड़ी कूटनीतिक पहल के तौर पर करना चाहिए था, लेकिन सरकार इस दिशा में सुस्त नजर आ रही है।
ट्रंप और नेतन्याहू के साथ संबंधों के कारण कूटनीतिक हिचकिचाहट का आरोप
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा तंज कसते हुए कहा कि स्वघोषित ‘विश्वगुरु’ मिडिल ईस्ट संकट पर इसलिए चुप हैं क्योंकि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को नाराज नहीं करना चाहते। कांग्रेस सांसद के अनुसार, चुनावी और व्यक्तिगत संबंधों के दबाव में भारत की विदेश नीति अपनी स्वतंत्र पहचान खो रही है और वैश्विक शांति स्थापना में जो सक्रिय भूमिका भारत को निभानी चाहिए थी, वह कहीं नजर नहीं आ रही है।
फोन पर बातचीत और ‘फोटो-ऑप’ डिप्लोमेसी पर कांग्रेस का कड़ा कटाक्ष
सांसद ने पीएम मोदी द्वारा विदेशी नेताओं से की जा रही टेलीफोनिक चर्चाओं को भी अपर्याप्त बताया। उन्होंने कहा कि केवल फोन पर बात करने की अपनी सीमाएं होती हैं। रमेश ने कटाक्ष करते हुए लिखा कि शायद शिखर सम्मेलन इसलिए नहीं टाल दिए गए क्योंकि वहां “गले मिलने” (Hugplomacy) या उंगली हिलाकर ज्ञान देने वाले “फोटो-ऑप्स” के अवसर कम होते हैं। उनके अनुसार, आमने-सामने बैठकर की जाने वाली बहुपक्षीय वार्ताएं ही ठोस नतीजे निकाल सकती हैं, न कि केवल औपचारिक कॉल।
अमेरिकी नेतृत्व में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन पर निराशाजनक रुख
सिर्फ मोदी सरकार ही नहीं, जयराम रमेश ने अमेरिका की अध्यक्षता में होने वाले आगामी G20 शिखर सम्मेलन को लेकर भी नकारात्मक टिप्पणी की। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि इस सम्मेलन से “तानाशाही बातों” और “बकवास” के अलावा कुछ हासिल नहीं होने वाला है। उनके अनुसार, अमेरिका के नेतृत्व में वैश्विक समस्याओं का समाधान ढूंढना अब मुश्किल नजर आ रहा है, जिससे भारत जैसे देशों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच वार्ता के मायने
इन आरोपों के बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालातों पर चिंता व्यक्त की। ईरानी राष्ट्रपति ने भारत की अध्यक्षता में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन का जिक्र करते हुए आह्वान किया कि इस समूह को क्षेत्रीय शत्रुता रोकने और वैश्विक स्थिरता सुनिश्चित करने में अपनी “स्वतंत्र और सक्रिय” भूमिका निभानी चाहिए। ईरान ने तनाव कम करने के लिए भारत से रचनात्मक कदम उठाने का आग्रह किया है।

