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Bengal Election 2026: 1000 करोड़ की ‘डील’ और स्टिंग वीडियो ने मचाया सियासी कोहराम

Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मुहाने पर खड़ा है, लेकिन विकास के दावों से कहीं अधिक शोर ‘भ्रष्टाचार के आरोपों’ और ‘स्टिंग ऑपरेशन’ का सुनाई दे रहा है। चुनावी समर के बीच एक वायरल वीडियो ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है, जिसमें करोड़ों रुपये के लेन-देन और वोटों के ध्रुवीकरण की कथित साजिश का दावा किया गया है।

टीएमसी का स्टिंग ऑपरेशन

9 अप्रैल 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सोशल मीडिया पर एक कथित स्टिंग वीडियो जारी कर राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी। इस वीडियो में पूर्व टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर को एक अज्ञात व्यक्ति के साथ चर्चा करते हुए दिखाया गया है। टीएमसी का दावा है कि भाजपा ने कबीर को अल्पसंख्यक वोटों में सेंध लगाने और ममता बनर्जी की सरकार को अस्थिर करने के लिए $1000$ करोड़ रुपये का ऑफर दिया है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि इस डील के तहत 200 से 300 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान पहले ही किया जा चुका है। टीएमसी ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए ईडी (ED) जांच की मांग की है।

अमित शाह का तीखा पलटवार

शुक्रवार को कोलकाता में भाजपा का ‘संकल्प पत्र’ जारी करने पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। शाह ने तंज कसते हुए कहा कि ममता बनर्जी की टीम ऐसी 2,000 फर्जी क्लिप बनाने में माहिर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हुमायूं कबीर और भाजपा की विचारधारा ‘उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव’ की तरह है, जो कभी नहीं मिल सकते। शाह ने कड़े लहजे में कहा कि भाजपा उस व्यक्ति से हाथ मिलाने के बजाय 20 साल विपक्ष में बैठना पसंद करेगी, जिसका एजेंडा बंगाल में बाबरी मस्जिद जैसा निर्माण करना हो।

हुमायूं कबीर की सफाई

विवाद के केंद्र में रहे हुमायूं कबीर ने खुद को निर्दोष बताते हुए इसे डीपफेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की साजिश करार दिया है। कबीर का कहना है कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर टीएमसी ने उनकी छवि धूमिल करने के लिए यह फर्जी वीडियो तैयार किया है। उन्होंने इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने और टीएमसी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज करने की बात कही है। हालांकि, इस विवाद का तत्काल खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा, क्योंकि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने कबीर से अपने सारे रिश्ते तोड़ लिए हैं।

चुनावी वादे बनाम आरोप

जैसे-जैसे 23 अप्रैल के मतदान की तारीख करीब आ रही है, बंगाल का चुनावी दंगल विकास बनाम विवाद में तब्दील हो गया है। एक तरफ भाजपा ने अपने घोषणापत्र में सातवां वेतन आयोग लागू करने और महिलाओं को बड़ी आर्थिक सहायता देने का दांव खेला है, तो दूसरी तरफ टीएमसी ‘साजिश और बाहरी’ के नैरेटिव पर टिकी है। 1000 करोड़ की इस कथित ‘डील’ ने मतदाताओं के बीच वैचारिक विभाजन को और गहरा कर दिया है। अब देखना यह है कि बंगाल की जनता विकास के वादों पर भरोसा करती है या इन सनसनीखेज आरोपों का असर मतपेटियों पर दिखता है।

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