US Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से चल रही शांति वार्ता के अचानक विफल होने से दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। इस कूटनीतिक विफलता के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की पूर्ण नाकेबंदी का आदेश जारी कर दिया है। इस फैसले ने न केवल युद्ध की आहट तेज कर दी है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार को भी अस्थिर कर दिया है।
कूटनीति की हार और आरोप-प्रत्यारोप
अमेरिका-ईरान के बीच समझौते की उम्मीदें उस समय धराशायी हो गईं जब दोनों देशों के प्रतिनिधि किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँच सके। इस विफलता पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका को आड़े हाथों लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिकी सरकार अपनी “तानाशाही नीति” छोड़कर ईरानी राष्ट्र के संप्रभु अधिकारों का सम्मान करती, तो समझौता मुमकिन था। वहीं, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर निराशा जाहिर करते हुए कहा कि 47 वर्षों में सबसे गंभीर स्तर पर चल रही वार्ता के दौरान जब ईरान समझौते के सबसे करीब था, तब उसे अमेरिका के “अधिकतमवाद” (Maximalism) और बदलते लक्ष्यों का सामना करना पड़ा।
कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा दी है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड $7.60 की भारी बढ़त के साथ $102.80 प्रति बैरल पर पहुँच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में भी $8.31 का उछाल दर्ज किया गया, जिससे इसकी कीमतें $104.88 प्रति बैरल के स्तर को छू गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव जारी रहा, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वैश्विक स्तर पर बड़ी वृद्धि देखी जा सकती है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी का रणनीतिक आदेश
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए अमेरिकी नौसेना को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की घेराबंदी शुरू करने का निर्देश दिया है। ट्रंप का तर्क है कि ईरान के साथ लंबी बातचीत का अब कोई मतलब नहीं रह गया है क्योंकि संघर्ष-विराम की स्थिति खतरे में है। राष्ट्रपति ने यह भी स्वीकार किया कि छह हफ्ते पहले ईरान पर हमला करने के उनके फैसले और मौजूदा नाकेबंदी का असर नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों पर पड़ सकता है, जिससे तेल और गैसोलीन की कीमतें ऊँची बनी रह सकती हैं।
ईरानी बंदरगाहों पर समुद्री यातायात का संकट
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने घोषणा की है कि राष्ट्रपति के आदेशानुसार स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजे (भारतीय समय शाम 7:30 बजे) से ईरान के बंदरगाहों की ओर जाने वाले सभी समुद्री जहाजों को रोका जाएगा। इसके अतिरिक्त, ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उन जहाजों को भी जब्त करने या रोकने का निर्देश दिया है जिन्होंने ईरान को किसी भी प्रकार का ‘टोल’ या शुल्क चुकाया है। ट्रंप ने ईरान पर “जबरन वसूली” का गंभीर आरोप लगाया है। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बेनीज़ ने इस फैसले को “एकतरफा” करार दिया है और कहा है कि उन्हें इस नाकेबंदी में मदद के लिए अमेरिका से कोई आधिकारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है।

