Delhi-Dehradun Expressway: आज का दिन उत्तराखंड और दिल्ली के बीच यात्रा करने वालों के लिए ऐतिहासिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज देहरादून में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (Delhi-Dehradun Expressway) का औपचारिक उद्घाटन कर इसे आम जनता को समर्पित करेंगे। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दिल्ली और देहरादून के बीच की दूरी महज 2.5 घंटे में सिमट जाएगी, जो पहले 6 से 7 घंटे का समय लेती थी। यह न केवल समय बचाएगा, बल्कि पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करेगा।
यातायात नियमों का कड़ाई से पालन और हाई-स्पीड कॉरिडोर के दिशा-निर्देश
परिवहन विभाग ने इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर सफर करने वालों के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं। परिवहन उपायुक्त शैलेश तिवारी के मुताबिक, सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक्सप्रेसवे ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को बेहद चाक-चौबंद रखा गया है। यात्रियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे मार्ग के बीच में न तो गाड़ी रोकें और न ही मोड़ने की कोशिश करें। सफर शुरू करने से पहले ही अपने प्रवेश (Entry) और निकास (Exit) पॉइंट्स को तय कर लेना अनिवार्य है ताकि यातायात का प्रवाह बाधित न हो।
राजाजी नेशनल पार्क और वन्यजीव संरक्षण हेतु ‘नो हॉर्न जोन’ का प्रावधान
इस एक्सप्रेसवे की एक बड़ी विशेषता इसका इको-फ्रेंडली डिजाइन है। मार्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राजाजी नेशनल पार्क के संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्र से होकर गुजरता है। वन्यजीवों की शांति और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस पूरे वाइल्डलाइफ कॉरिडोर में हॉर्न बजाना पूरी तरह वर्जित (Silent Zone) घोषित किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण और जानवरों के प्रति किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ऑटोमैटिक चालान प्रणाली और रात में लो बीम हेडलाइट की अनिवार्यता
पूरे एक्सप्रेसवे को आधुनिक निगरानी तंत्र और इलेक्ट्रॉनिक कैमरों से लैस किया गया है। यदि कोई चालक निर्धारित गति सीमा (Speed Limit) को पार करता है या गलत दिशा में वाहन चलाता है, तो उसका ऑटोमैटिक चालान जनरेट होगा। इसके अलावा, रात के समय दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ‘लो बीम हेडलाइट’ का उपयोग अनिवार्य किया गया है। इससे सामने से आने वाले ड्राइवरों की आंखों पर चकाचौंध नहीं पड़ेगी और सफर सुरक्षित बना रहेगा।
आशारोड़ी और डाटकाली टनल के पास दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में बरतें सावधानी
देहरादून में प्रवेश करते समय यात्रियों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। आशारोड़ी के समीप ढाल और तीव्र मोड़ पर वाहन की गति को नियंत्रित रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि ढलान पर तेज रफ्तार से नियंत्रण खोने का खतरा रहता है। साथ ही, डाटकाली मंदिर के पास नवनिर्मित टनल क्षेत्र में भी गति धीमी रखने की सलाह दी गई है। इन ‘ब्लैक स्पॉट्स’ पर सावधानी बरतकर ही बड़े हादसों को टाला जा सकता है।
ईंधन जांच और टायरों में हवा के मानक दबाव का विशेष ध्यान रखें
चूंकि यह एक्सप्रेसवे अभी नया है, इसलिए इस पर पेट्रोल पंप और मैकेनिक जैसी बुनियादी सुविधाएं अभी विकसित की जा रही हैं। परिवहन विभाग ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे गाड़ी की फिटनेस और फ्यूल पहले ही चेक कर लें। विशेष रूप से टायरों में हवा का प्रेशर मानक के अनुसार ही रखें, क्योंकि अत्यधिक तेज रफ्तार और घर्षण के कारण टायर फटने की संभावना बढ़ जाती है। अपनी यात्रा को सुगम बनाने के लिए इन सुरक्षा मानकों का पालन करना आपकी जेब और जान दोनों के लिए हितकारी है।

