Annamalai Resign: दक्षिण भारत की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। तमिलनाडु भाजपा (BJP) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने भारतीय जनता पार्टी से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार भी कर लिया है। बताया जा रहा है कि अन्नामलाई पिछले कुछ महीनों से पार्टी के भीतर उपेक्षित महसूस कर रहे थे और नेतृत्व से नाराज चल रहे थे। हालांकि, पार्टी से उनकी विदाई बेहद गरिमापूर्ण और सम्मानजनक तरीके से हुई है।
सोशल मीडिया पर चिट्ठी पोस्ट करने के बजाय दिल्ली पहुंचे अन्नामलाई
आमतौर पर जब कोई बड़ा नेता पार्टी छोड़ता है, तो वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस्तीफा पोस्ट कर देता है या आलाकमान को चिट्ठी भेज देता है। लेकिन के. अन्नामलाई ने एक अलग और परिपक्व रास्ता चुना। पार्टी से अलग होने की अंतिम घोषणा करने से पहले उन्होंने देश की राजधानी दिल्ली का दौरा किया। दिल्ली में उन्होंने देश के गृहमंत्री अमित शाह समेत बीजेपी के कई केंद्रीय नीति-निर्धारकों और शीर्ष नेताओं से व्यक्तिगत मुलाकात की। इस हाई-प्रोफाइल बैठक के दौरान उन्होंने शीर्ष नेतृत्व के सामने उन सभी कारणों और परिस्थितियों को विस्तार से रखा, जिनकी वजह से वह यह बड़ा कदम उठाने पर मजबूर हुए।
गृहमंत्री से सीक्रेट मीटिंग
सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह और के. अन्नामलाई के बीच एक बेहद अहम और गुप्त बैठक हुई थी। इसी मुलाकात के दौरान उन्होंने भाजपा से नाता तोड़ने के अपने फैसले की आधिकारिक जानकारी शाह को दी। कयास लगाए जा रहे हैं कि अन्नामलाई अब तमिलनाडु की क्षेत्रीय राजनीति में अपनी एक स्वतंत्र और नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर सकते हैं।
भविष्य और अवसरों की कमी
अन्नामलाई के इस चौंकाने वाले फैसले के पीछे की इनसाइड स्टोरी भी अब सामने आने लगी है। एनडीटीवी (NDTV) से बात करते हुए एक विश्वसनीय राजनीतिक सूत्र ने खुलासा किया, “अन्नामलाई को पिछले कुछ समय से ऐसा महसूस होने लगा था कि वर्तमान सांगठनिक ढांचे में भाजपा के भीतर उनके लिए आगे बढ़ने के अवसर सीमित हो चुके हैं और वहां उनका राजनीतिक भविष्य बहुत उज्ज्वल नहीं है।” साल २०२१ में खाकी वर्दी छोड़कर भगवा चोला पहनने वाले ४१ वर्षीय अन्नामलाई ने आखिरकार ३ साल बाद बेहद सम्मानजनक तरीके से बीजेपी को अलविदा कह दिया।
नई राजनीतिक जमीन की तलाश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई बीजेपी छोड़ने के बाद भी शांत बैठने वाले नहीं हैं। वह पहले से ही “वी द लीडर्स” (We The Leaders) नामक एक सामाजिक संगठन का संचालन कर रहे हैं। इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में वह अपने इसी एनजीओ या संस्था को एक पूर्ण राजनीतिक दल (पार्टी) के रूप में तब्दील कर सकते हैं और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अपनी ताकत दिखा सकते हैं।
द्रविड़ गढ़ में कमल खिलाने का रिकॉर्ड
तमिलनाडु जैसे द्रविड़ राजनीति के गढ़ में भारतीय जनता पार्टी को एक मजबूत विकल्प के रूप में खड़ा करने का पूरा श्रेय के. अन्नामलाई की आक्रामक कार्यशैली को ही जाता है। पूर्व पुलिस अधिकारी (IPS) के रूप में अपनी पहचान रखने वाले अन्नामलाई में भाजपा केंद्रीय नेतृत्व को एक बड़ा ‘स्पार्क’ दिखा था, जिसके बाद उन्हें सीधे प्रदेश कमान सौंपी गई थी। उन्हीं के करिश्माई नेतृत्व का नतीजा था कि साल २०१९ के लोकसभा चुनाव में जहां भाजपा को तमिलनाडु में महज ३.६६ प्रतिशत वोट मिले थे, वहीं २०२४ के आम चुनाव में यह आंकड़ा बढ़कर सीधे ११ प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। ऐसे में उनका जाना दक्षिण में भाजपा के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

