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Lucknow Fire: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह देर रात पहुंचे घटनास्थल, केजीएमयू में घायलों का इलाज जारी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुआ भीषण अग्निकांड और गहरा गया है। सोमवार देर शाम इस भयावह हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या 15 है, जिनमें अधिकांश युवा छात्र और कामकाजी कर्मचारी शामिल हैं। इस बड़ी आपदा की खबर मिलते ही स्थानीय सांसद और देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार देर रात सीधे घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने जल चुकी बहुमंजिला इमारत का बारीकी से निरीक्षण किया और मौके पर मौजूद आला अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्यों (Rescue Operations) की प्रगति रिपोर्ट ली।

सीएम योगी और डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने किया केजीएमयू का दौरा

रक्षा मंत्री के आगमन से पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने आपदा स्थल के साथ-साथ किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) का भी तत्काल दौरा किया। मुख्यमंत्री ने अस्पताल के आईसीयू और वार्डों में भर्ती झुलसे हुए मरीजों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और डॉक्टरों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के कड़े निर्देश दिए। इस आपदा के मूल कारणों की त्वरित पड़ताल के लिए सूबे के मुखिया ने पहले ही एक उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT Investigation) का गठन कर दिया है, जो इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ेगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जताया गहरा शोक

अलीगंज बिल्डिंग फायर हादसे का जायजा लेने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस घटना को अत्यंत पीड़ादायक बताया। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए असमय काल के गाल में समाए मासूमों और युवाओं के प्रति गहरा दुख व्यक्त किया। रक्षा मंत्री ने कहा, “इस दुखद और हृदयविदारक घटना में जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। संकट की इस भीषण घड़ी में पूरी केंद्र और राज्य सरकार तथा पूरा देश पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा है।”

दमकल कर्मियों की सूझबूझ और रेस्क्यू ऑपरेशन की चुनौतियाँ

सोमवार को जब अलीगंज की इस बहुमंजिला इमारत में आग की लपटें बेकाबू हुईं, तो अंदर फंसे लोगों को निकालने के लिए दमकल कर्मियों (Firefighters) को भारी मशक्कत करनी पड़ी। आगे की तरफ से भड़क रही आग के कारण अंदर प्रवेश करना असंभव था, जिसके बाद रेस्क्यू टीम ने सूझबूझ दिखाते हुए कटर और भारी औजारों की मदद से बिल्डिंग की पिछली कंक्रीट की दीवार को तोड़ा। दीवार के रास्ते अंदर दाखिल होकर ही दमकल विभाग और राहत कर्मियों ने अंदर फंसे कई झुलसे हुए लोगों को बाहर निकाला और एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल भिजवाया।

घटनास्थल के आसपास पसरा सन्नाटा और ब्लैकआउट

इस भीषण त्रासदी के बाद एहतियात के तौर पर अलीगंज के सेक्टर-डी इलाके की विद्युत आपूर्ति पूरी तरह ठप कर दी गई है। पूरी कॉलोनी और घटनास्थल के आसपास देर रात तक घना अंधेरा छाया रहा। सुरक्षा और साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने आग लगी हुई इमारत के चारों ओर 500 मीटर के रेडियस (दायरे) को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है। रात 11 बजे भी आईटी चौराहे से लेकर पुरनिया चौराहे तक चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात रहा, ताकि राहत कार्यों में लगी वीआईपी गाड़ियों और आपातकालीन एम्बुलेंसों की आवाजाही बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से हो सके।

त्रासदी के बीच श्रद्धा का माहौल

एक तरफ जहाँ अलीगंज का यह इलाका चीख-पुकार और प्रशासनिक हलचल से दहल उठा था, वहीं दूसरी तरफ जेठ के महीने में आने वाले पारंपरिक ‘बड़े मंगल’ के पावन पर्व की तैयारियां भी देर रात तक चलती रहीं। आग की इस दर्दनाक वारदात के साए के बीच ही, अलीगंज मुख्य मार्ग से लेकर डालीबाग तक सड़कों के किनारे श्रद्धालुओं द्वारा लगाए जाने वाले विशाल भंडारों के ढेरों टेंट सज गए हैं। पूरा इलाका एक तरफ जहां गहरे शोक में डूबा है, वहीं दूसरी तरफ भगवान हनुमान के भक्तों की आस्था के पंडाल भी देर रात तक आकार लेते दिखे।

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