Ram Mandir Donation Row: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के गंभीर मामले ने अब देश में एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद कीर्ति आजाद ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब आस्था के इतने बड़े केंद्र और उसके कामकाज के तरीकों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, तो ट्रस्ट प्रबंधन की ओर से इस पर एक स्पष्ट, ईमानदार और त्वरित जवाब आना चाहिए। टीएमसी सांसद ने इस पूरे घटनाक्रम को जनता के विश्वास से जोड़ते हुए मामले में उच्च स्तरीय पारदर्शिता बरतने की अपील की है।
कीर्ति आजाद का तीखा पलटवार
अपने आधिकारिक बयान में टीएमसी नेता कीर्ति आजाद ने पुरानी राजनीतिक घटनाओं का जिक्र करते हुए केंद्र की सत्ताधारी दल की दोहरी नीति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी अक्सर यह राजनीतिक आरोप लगाती रही है कि अयोध्या आंदोलन के दौरान कारसेवकों पर गोली चलाने के आदेश के लिए तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव सीधे तौर पर जिम्मेदार थे। आजाद ने इसी बिंदु पर सरकार को घेरते हुए सवाल उठाया कि अगर भारतीय जनता पार्टी का सचमुच यही मानना है, तो फिर उनकी ही सरकार के कार्यकाल में मुलायम सिंह यादव को देश के प्रतिष्ठित ‘पद्म विभूषण’ (सांसद ने पद्म भूषण का संदर्भ दिया) सम्मान से क्यों नवाजा गया? उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा विरोधाभास है, जिसका जवाब जनता को मिलना ही चाहिए।
नृपेंद्र मिश्रा की प्रशासनिक भूमिका और पीएमओ से लेकर राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष बनने पर उठाए सवाल
राजनीतिक बयानों से आगे बढ़ते हुए कीर्ति आजाद ने तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सीधे सवाल दागे। उन्होंने पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा का नाम लेते हुए पूछा कि यदि उस दौर की अप्रिय घटनाओं और प्रशासनिक फैसलों को लेकर किसी अधिकारी की जवाबदेही पर संशय था, तो उन्हें बाद में देश के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में इतनी महत्वपूर्ण और प्रभावशाली जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई? इतना ही नहीं, उन्हें राम मंदिर निर्माण से जुड़ी बेहद संवेदनशील और प्रमुख समिति का अध्यक्ष (प्रमुख) क्यों बनाया गया? टीएमसी सांसद के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को अतीत की घटनाओं के लिए घेरा जाता है, तो बाद में उन्हें मिलने वाले बड़े पदों के पीछे के वास्तविक कारणों को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
राम जन्मभूमि से जुड़े विवादों की निष्पक्ष जांच की मांग
राम मंदिर निर्माण कार्य और वहां की सुरक्षा व वित्तीय व्यवस्थाओं की निगरानी करने वाले जिम्मेदार पदाधिकारियों को कटघरे में खड़ा करते हुए कीर्ति आजाद ने एक व्यापक और निष्पक्ष जांच की पैरवी की है। उनके मुताबिक, राम मंदिर जैसे करोड़ों सनातनी भाई-बहनों की अटूट आस्था के केंद्र से जुड़े किसी भी वित्तीय घोटाले, चोरी या विवाद को हल्के में नहीं लिया जा सकता। यदि इस पावन स्थल के प्रबंधन पर उंगलियां उठ रही हैं, तो सभी संबंधित पक्षों से कड़ी पूछताछ होनी चाहिए और जो भी दूध का दूध और पानी का पानी हो, उसे देश की जनता के सामने रखा जाना चाहिए ताकि मंदिर की शुचिता और लोगों का अटूट विश्वास हर हाल में बरकरार रहे।

