Sonam Wangchuk hunger strike: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन के अनुसार, लगातार अनशन के कारण वांगचुक को गंभीर मांसपेशियों की क्षति (मसल डैमेज) हुई है और वे इस समय अत्यधिक शारीरिक पीड़ा का सामना कर रहे हैं। इस असहनीय दर्द के बावजूद उन्होंने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को वापस लेने से साफ इनकार कर दिया है। वांगचुक का स्पष्ट कहना है कि जब तक केंद्र सरकार उनकी मांगों को लेकर बातचीत की कोई ठोस पहल नहीं करती, तब तक उनका यह अनशन जारी रहेगा। इस बीच, संगठन के इस बड़े विरोध प्रदर्शन को आज पूरे 25 दिन हो चुके हैं, जबकि वांगचुक के अनशन का आज 17वां दिन है।
वांगचुक का वजन 8.5 किलो गिरा, ब्लड प्रेशर सामान्य स्तर से नीचे पहुंचा
कॉजपा (CJP) द्वारा जारी किए गए ताजा मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, भूख हड़ताल पर बैठने के बाद से सोनम वांगचुक के शरीर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अब तक उनका कुल वजन 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है। जांच के दौरान उनका रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) भी 109/70 मिमी एचजी पाया गया है, जो उनकी शारीरिक कमजोरी को दर्शाता है। कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बताया कि वांगचुक की मांसपेशियां दिन-ब-दिन तेजी से कमजोर और शिथिल होती जा रही हैं, जिसके चलते उन्हें उठने-बैठने में भी असहनीय दर्द और पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है।
दीपके की भावुक अपील को वांगचुक ने नकारा, बातचीत के लिए सरकार को ठहराया जिम्मेदार
संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए वांगचुक की स्थिति बयां की। उन्होंने लिखा कि वांगचुक का शरीर तेजी से कमजोर पड़ रहा है। दीपके ने खुद अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर वांगचुक से अपनी सेहत की खातिर अनशन समाप्त करने की भावुक अपील की थी। इस पर वांगचुक ने बेहद शांत और गंभीर स्वर में जवाब दिया, “मुझसे अनशन तोड़ने की बात मत कहिए। इसके बजाय सरकार से यह सवाल पूछिए कि वह हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों और मांगों पर बातचीत की टेबल पर क्यों नहीं आना चाहती।”
अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे ने जताई चिंता, 20 जुलाई के मार्च को मिला समर्थन
वांगचुक की नाजुक स्थिति को देखते हुए देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं ने भी गहरी चिंता जताई है। दीपके ने बताया कि आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने उन्हें फोन कर वांगचुक के स्वास्थ्य का हाल जाना। इसके अलावा, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी दीपके से फोन पर बात कर वांगचुक की सुरक्षा और सेहत को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। दोनों ही बड़े नेताओं ने वांगचुक से आंदोलन का कोई वैकल्पिक रास्ता चुनने का अनुरोध किया है। साथ ही, आगामी 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन होने वाले ‘चलो संसद’ मार्च को अपना पूरा नैतिक समर्थन देने का भरोसा दिया।
अस्पताल से डिस्चार्ज हुए छात्र नेता दीपक, नेहा और मनीष का अनशन जारी
इस आंदोलन के तहत अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के सदस्य दीपक की सोमवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें इलाज के लिए तत्काल डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां मंगलवार सुबह उन्हें छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों ने बताया कि दीपक की हृदय गति (पल्स रेट) में उतार-चढ़ाव देखा गया था, लेकिन ईसीजी और अन्य जरूरी मेडिकल टेस्ट सामान्य आने के बाद उन्हें जाने की अनुमति दी गई। हालांकि, विरोध स्थल पर अन्य छात्र नेता नेहा, मनीष और आमीन अभी भी अपनी मांगों को लेकर अनशन पर डटे हुए हैं।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और ‘चलो संसद’ मार्च की तैयारियों में जुटा संगठन
कॉजपा मुख्य रूप से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं व धांधली के कारण आत्महत्या करने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग कर रही है। संगठन ने 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद सत्र के दिन ‘चलो संसद’ मार्च का आह्वान किया है। इसके लिए देशव्यापी ‘मिस्ड कॉल’ अभियान भी चलाया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ा जा सके। उल्लेखनीय है कि यह व्यापक आंदोलन 20 जून से लगातार चल रहा है, जिसमें सोनम वांगचुक 28 जून को शामिल हुए थे।

