श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। राम मंदिर दान चोरी और जमीन खरीद-फरोख्त के आरोपों के बाद, अब उनके एक कथित वायरल वीडियो ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे इस वीडियो में उनके द्वारा दिए गए बयान को लेकर अयोध्या में संतों और स्थानीय लोगों के बीच भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इस मामले में उनके खिलाफ पुलिस में लिखित शिकायत देकर तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की गई है।
धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप
लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, अयोध्या के रामजानकी मंदिर के महंत संत दास (उर्फ राजेश सिंह मानव) ने चंपत राय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने चंपत राय पर धार्मिक भावनाएं आहत करने और अयोध्या में जमीन घोटाले में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया है। महंत संत दास ने श्रीरामजन्मभूमि थाने में एक लिखित तहरीर सौंपकर कानूनी कार्रवाई की मांग की। इस दौरान उन्होंने अपने समर्थकों के साथ थाने के बाहर जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन भी किया।
“हमें राम राज्य नहीं चाहिए”
एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू और सोशल मीडिया क्लिप का हवाला देते हुए महंत संत दास ने आरोप लगाया कि चंपत राय वीडियो में स्पष्ट रूप से कहते सुनाई दे रहे हैं— “हमको राम राज्य नहीं चाहिए। भगवान राम जब अपने भाई लक्ष्मण के नहीं हुए तो हम लोगों के क्या होंगे।” इस बयान पर तीखी आपत्ति जताते हुए महंत ने चंपत राय को ‘रामद्रोही’ और ‘राम राज्य से घृणा करने वाला’ करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या के विकास के नाम पर कई गरीबों के मकान ढहा दिए गए, लेकिन उन्हें मुआवजे के नाम पर एक रुपया तक नहीं दिया गया।
इंटरनेट पर प्रसारित क्लिप का सच
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में चंपत राय कथित तौर पर यह कहते दिख रहे हैं— “रामराज्य बहुत कठिन है, रामराज्य लाने से तो मैं ही डरता हूँ। राम ने अपने भाई को नहीं बख्शा, इसलिए रामराज्य की मैं कल्पना नहीं करता, जो करते हैं वो करें। अयोध्या में लाखों लोग आएंगे हम यह कल्पना कर रहे हैं। वह सड़क, हवाई जहाज और ट्रेन से आएंगे। इसलिए सड़कें कितनी चौड़ी हों, प्लेटफॉर्म कितने लंबे हों, सरकारों को इसकी व्यवस्था करनी होगी।” उनके इस बयान को विकास बनाम धार्मिक आदर्शों की बहस से जोड़कर देखा जा रहा है।
वीडियो की प्रामाणिकता की जांच जारी
हालांकि, इस वायरल वीडियो की सत्यता और प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह बयान किस संदर्भ में और कब दिया गया था। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ऐसी टिप्पणियां करोड़ों राम भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाती हैं, इसलिए मामले की गहन जांच कर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। पुलिस का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे। गौरतलब है कि इससे पहले भी चंपत राय का एक पुराना वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे पत्रकारों के प्रति कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग करते नजर आए थे।

