Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। करूर में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि जनता का शोषण करने वाले किसी भी भ्रष्ट अधिकारी या व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने राज्य की जनता से अपील की कि यदि कोई भी लोक सेवक या अधिकारी उनसे किसी काम के बदले अनुचित लाभ या घूस मांगता है, तो वे उसे साफ तौर पर मना कर दें।
जनता को मुख्यमंत्री विजय का अटूट भरोसा
करूर की रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने आम जनता का हौसला बढ़ाते हुए एक बेहद आत्मीय और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने भीड़ से कहा, “जब कोई भी आपसे रिश्वत की मांग करे, तो बिना डरे उन्हें सीधे कह दें कि आप पैसे नहीं देंगे। मैं हर परिस्थिति में आपके साथ खड़ा रहूंगा।” उन्होंने जनता में नया विश्वास फूंकते हुए आगे कहा, “अगर इसके बाद भी कोई अधिकारी आप पर दबाव बनाता है, तो उससे सीना तानकर कहें कि हमारा बेटा, हमारा भाई, हमारा विजय इस राज्य पर राज कर रहा है।” मुख्यमंत्री के इस बयान पर रैली में मौजूद हजारों लोगों ने जोरदार तालियों और नारों के साथ उनका स्वागत किया।
सत्ता के दुरुपयोग पर पूर्ण विराम का दावा
मुख्यमंत्री विजय ने जनसमूह को आश्वस्त किया कि शासन व्यवस्था में शुचिता लाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “जब तक प्रदेश की जनता मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है, तब तक भ्रष्टाचार करने वाला, घूस लेने वाला या अपनी राजनीतिक व प्रशासनिक ताकत का गलत इस्तेमाल करने वाला कोई भी शख्स अपनी इन हरकतों को जारी नहीं रख पाएगा।” उनके इस बयान को राज्य की प्रशासनिक मशीनरी को दी गई एक सीधी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
विपक्षी दल का तीखा पलटवार
मुख्यमंत्री विजय के इन दावों पर सत्ता से बाहर रही मुख्य विपक्षी पार्टी DMK ने जोरदार हमला बोला है। DMK के वरिष्ठ नेता टी.के.एस. इलांगोवन ने मुख्यमंत्री विजय की पार्टी (TVK) को ही भ्रष्टाचार के कटघरे में खड़ा कर दिया। न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, इलांगोवन ने टीवीके के आंतरिक अंतर्विरोधों की ओर इशारा करते हुए कहा कि खुद विजय की पार्टी के एक वकील ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उस याचिका में आरोप लगाया गया है कि पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और जनरल सेक्रेटरी ने वकीलों की नियुक्ति के नाम पर 1 लाख से लेकर 20 लाख रुपये तक की भारी-भरकम रिश्वत ली है। इलांगोवन ने तंज कसते हुए कहा कि यह आरोप विपक्ष ने नहीं, बल्कि खुद उनकी पार्टी के सदस्य ने लगाए हैं, जिसका जवाब शायद खुद मुख्यमंत्री के पास भी नहीं है।
करूर भगदड़ मामले पर पुलिस प्रशासन की खिंचाई
भ्रष्टाचार के अलावा मुख्यमंत्री विजय ने करूर कार्यक्रम के दौरान हुई दुखद भगदड़ और उसमें जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने इस बड़ी त्रासदी के लिए सीधे तौर पर स्थानीय पुलिस और प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। विजय ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा, “नमक्कल की बैठक के बाद जब हम करूर आ रहे थे, तो पुलिस ने हमें भारी भीड़ को लेकर कोई चेतावनी क्यों नहीं दी? अगर स्थिति नियंत्रण से बाहर थी, तो वे कार्यक्रम रद्द कर सकते थे। पुलिस की ढिलाई के बावजूद मैंने उन पर भरोसा किया। इस पूरी अव्यवस्था और लापरवाही के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है?”

