Sonam Wangchuk Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर लद्दाख की सुरक्षा और देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांगों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन लगातार जारी है। इस बीच, विपक्षी नेताओं का जंतर-मंतर पहुंचने का सिलसिला तेज हो गया है। शुक्रवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की।
इस दौरान उन्होंने सोनम वांगचुक और उनके साथ अनशन पर बैठे अन्य साथियों से अपनी जान जोखिम में न डालने की पुरजोर अपील की। इस मुलाक़ात (Pawan Khera Sonam Wangchuk Protest) ने केंद्र सरकार की नीतियों और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के प्रति उसके रवैये पर एक बार फिर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
पवन खेड़ा ने मोदी सरकार को घेरा, याद दिलाया ‘राजधर्म
सोनम वांगचुक से मुलाकात के बाद कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा (Pawan Khera Jantar Mantar) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सरकार को राजधर्म की याद दिलाई। उन्होंने लिखा, “लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करना एक संवैधानिक अधिकार है। जब देश के नागरिक अपनी बात रखने के लिए भूख हड़ताल करते हैं, तो सरकार का यह परम कर्तव्य है कि वह उनकी बात सुने, न कि उन्हें नजरअंदाज करे। यही सच्चा राजधर्म है।”
खेड़ा ने पूर्ववर्ती सरकारों का उदाहरण देते हुए कहा कि साल 1984 में इंदिरा गांधी और 2011 में डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने यह साबित किया था कि लोकतंत्र में सरकार की पहली जिम्मेदारी बातचीत करना है, चाहे असहमति कितनी भी बड़ी क्यों न हो। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने पूरी तरह से चुप्पी साध ली है, जो न केवल अहंकार है बल्कि घोर संवेदनहीनता भी है। उन्होंने वांगचुक से आग्रह किया कि अपने लोगों को खोने से कोई आंदोलन मजबूत नहीं होता, बल्कि आगे की लड़ाई के लिए जीवित रहना जरूरी है।
केसी वेणुगोपाल ने भी जताई चिंता, विपक्ष एकजुट
इस आंदोलन को मिल रहे कांग्रेस के समर्थन (Congress Support Ladakh Protest) की कड़ियों को जोड़ते हुए पवन खेड़ा ने पार्टी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल के बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वेणुगोपाल ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलनकारियों की बिगड़ती सेहत पर गहरी चिंता व्यक्त की थी।
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि एक ऐसी व्यवस्था के सामने, जो लोकतांत्रिक आवाजों के प्रति पूरी तरह उदासीन हो चुकी है, भूख हड़ताल जैसा कदम उठाना जानलेवा साबित हो सकता है। इसलिए विपक्ष लगातार प्रदर्शनकारियों से अपना स्वास्थ्य बचाने और दूसरे रास्तों से लड़ाई जारी रखने की अपील कर रहा है।
अरविंद केजरीवाल ने भी मंच से पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली पर बोला हमला
कांग्रेस से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी जंतर-मंतर पहुंचे थे। उन्होंने मंच से देश की चरमराती परीक्षा प्रणाली और लगातार हो रहे पेपर लीक के मामलों (Arvind Kejriwal on Paper Leak) पर मोदी सरकार को जमकर आड़े हाथों लिया। केजरीवाल ने कहा कि सोनम वांगचुक किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए यह कठिन अनशन (Sonam Wangchuk Hunger Strike Delhi) कर रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा, “जब एक छात्र किसी प्रतियोगी परीक्षा में बैठता है, तो वह केवल एक पेपर देने नहीं जाता, बल्कि अपनी आंखों में सुनहरे सपनों की उम्मीद लेकर जाता है। लेकिन आज जिस तरह हर साल पेपर लीक हो रहे हैं, उससे युवाओं का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है। मैंने खुद आईआईटी से पढ़ाई की है और मेरे बच्चों ने भी ये परीक्षाएं दी हैं, मगर हमारे समय में ऐसी चिंताजनक स्थिति कभी नहीं थी। इस पूरे सिस्टम को अब बदलना ही होगा।”

