NEET Paper Leak: पेपर लीक के मुद्दे पर देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित आंदोलन में बड़ी संख्या में युवाओं, खासकर Gen-Z वर्ग ने भाग लिया। आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की चर्चा के बीच विपक्षी दल इसे युवाओं की बड़ी जीत बता रहे हैं। इसी क्रम में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा कि यदि भविष्य में राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनते हैं तो केंद्र सरकार में किसी Gen-Z नेता को शिक्षा मंत्री बनाया जाएगा।
पेपर लीक आंदोलन के बाद Gen-Z को संसद तक पहुंचाने की वकालत
हैदराबाद में शनिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में रेवंत रेड्डी ने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवाओं की भूमिका केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इंडिया गठबंधन के सभी सहयोगी दलों से चर्चा करेंगे ताकि Gen-Z के प्रतिनिधियों को राजनीति में उचित स्थान मिल सके। उनका कहना था कि युवाओं की आवाज संसद तक पहुंचेगी तो शिक्षा व्यवस्था और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी तरीके से चर्चा हो सकेगी।
रेड्डी ने कहा कि आंदोलन में शामिल युवाओं ने यह साबित किया है कि लोकतंत्र में संगठित जनभागीदारी बदलाव का माध्यम बन सकती है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की सोच और ऊर्जा को नीति निर्माण का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
Gen-Z और चुनाव सुधार: न्यूनतम आयु 21 वर्ष करने की मांग
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने चुनावी सुधारों को लेकर भी महत्वपूर्ण मांग रखी। उन्होंने कहा कि तेलंगाना सरकार जल्द ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर एक प्रस्ताव पारित करेगी। इस प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र सरकार से लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष करने की मांग की जाएगी।
रेड्डी का कहना है कि आज का युवा शिक्षित, जागरूक और तकनीक से जुड़ा हुआ है। ऐसे में उसे कम उम्र में ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनने का अवसर मिलना चाहिए। उनका मानना है कि इससे राजनीति में नई सोच और युवा नेतृत्व को बढ़ावा मिलेगा।
पेपर लीक आंदोलन और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विपक्ष का हमला
नीट पेपर लीक के मुद्दे पर आयोजित कैंडल मार्च को संबोधित करते हुए रेवंत रेड्डी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि Gen-Z के नेतृत्व में हुए आंदोलन ने केंद्र सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना पद छोड़ना पड़ा। उन्होंने इस घटनाक्रम को युवाओं की लोकतांत्रिक शक्ति का उदाहरण बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब युवा संगठित होकर किसी मुद्दे पर आवाज उठाते हैं तो सरकारों को उनकी बात सुननी पड़ती है। उन्होंने आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग थी।
पेपर लीक विरोध मार्च में कई नेताओं की मौजूदगी
दिल्ली और अन्य राज्यों में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हैदराबाद में निकाले गए कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए। इस कार्यक्रम में तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क, राज्य सरकार के कई मंत्री और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के नेता भी मौजूद रहे।
विपक्षी दलों ने आंदोलन में भाग लेने वाले युवाओं की भूमिका की सराहना करते हुए इसे लोकतांत्रिक भागीदारी का सशक्त उदाहरण बताया। वहीं, रेवंत रेड्डी के बयान ने आने वाले समय में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी और शिक्षा नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

