Maharashtra Politics: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने मुंबई के श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कामकाज और अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को घेरा। उन्होंने दोनों मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग की।
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट विवाद पर प्रियंका चतुर्वेदी का हमला, पारदर्शिता की उठाई मांग
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट विवाद को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि देश के सबसे प्रतिष्ठित और आस्था के प्रमुख केंद्रों में शामिल मुंबई के श्री सिद्धिविनायक मंदिर में यदि प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप सामने आते हैं, तो यह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों का संचालन पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं पर महाराष्ट्र सरकार को घेरा
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट में गड़बड़ियों को लेकर प्रियंका चतुर्वेदी ने महाराष्ट्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे हैं। यदि उनकी निगरानी में इस तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं और ट्रस्टी स्वयं उन्हें पत्र लिखकर अनियमितताओं की जानकारी दे रहे हैं, तो यह बेहद गंभीर विषय है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि पूरा मामला ऐसा प्रतीत होता है मानो “चोर ही चोर को पकड़ने की कोशिश कर रहा हो।” उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अपील की कि वे व्यक्तिगत हस्तक्षेप करें और पूरे मामले की जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच कराएं ताकि सच्चाई सामने आ सके और मंदिर प्रशासन पर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।
राम मंदिर कथित वित्तीय अनियमितता और चोरी मामले में CBI जांच की मांग
राम मंदिर कथित चोरी मामले और राम मंदिर वित्तीय अनियमितता के मुद्दे पर भी प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी के बयान पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, इसलिए वह उस विवाद में नहीं पड़ना चाहतीं।
हालांकि उन्होंने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर कथित चोरी मामले में सरकार को स्वयं आगे बढ़कर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच करानी चाहिए थी। उनके अनुसार, यदि सरकार निष्पक्ष जांच से बचती हुई दिखाई देती है, तो स्वाभाविक रूप से लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं।
राम मंदिर जांच को लेकर सरकार से सवाल
राम मंदिर चोरी मामले की जांच को लेकर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर सीबीआई जांच कराने से परहेज क्यों किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता या चोरी की शिकायत सामने आई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कराने में देरी क्यों हो रही है।
उन्होंने कहा कि जनता के मन में यह सवाल है कि सरकार आखिर किसे बचाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता या संदेह की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। इसलिए पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि सभी तथ्यों का पता चल सके और लोगों का भरोसा कायम रहे।
धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता की जरूरत
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट विवाद और राम मंदिर कथित वित्तीय अनियमितता के मुद्दों को जोड़ते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि देश के बड़े धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका कहना था कि आस्था से जुड़े संस्थानों का संचालन किसी भी तरह के विवाद या संदेह से परे होना चाहिए।
उन्होंने दोहराया कि चाहे मामला मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट का हो या अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय विवाद का, दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उनके अनुसार, इससे न केवल तथ्यों का खुलासा होगा बल्कि श्रद्धालुओं का विश्वास भी और अधिक मजबूत होगा।

