Ayodhya News: राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अयोध्या में बड़ा बयान देते हुए कहा कि वह जीवन की अंतिम सांस तक अयोध्या नहीं छोड़ेंगे। चातुर्मास के दौरान अयोध्या पहुंचे चंपत राय ने संतों के आग्रह पर यह आश्वासन दिया। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के कथित मामले के बाद यह उनका प्रमुख सार्वजनिक दौरा माना जा रहा है। उनके इस बयान ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने तपस्वी छावनी और दिगंबर अखाड़ा में किया दर्शन
अयोध्या प्रवास के दौरान चंपत राय सबसे पहले तपस्वी छावनी पहुंचे, जहां संतों और वैदिक आचार्यों ने उनका पारंपरिक विधि-विधान से स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख केंद्र रहे दिगंबर अखाड़ा पहुंचकर दिवंगत महंत रामचंद्र दास परमहंस के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
दिगंबर अखाड़ा में उन्होंने महंत सुरेश दास और उनके उत्तराधिकारी राम लखन दास से मुलाकात की। दोनों के बीच लगभग एक घंटे तक विभिन्न धार्मिक और समसामयिक विषयों पर चर्चा हुई। यह मुलाकात राम मंदिर आंदोलन से जुड़े पुराने संबंधों को भी रेखांकित करती है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर चंपत राय बोले- एसआईटी रिपोर्ट के बाद रखूंगा अपना पक्ष
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर पूछे गए सवाल पर चंपत राय ने कहा कि वह फिलहाल इस विषय पर विस्तृत टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही वह सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखेंगे।
उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी भी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। इसलिए वह रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं और उसके बाद पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात सामने रखेंगे।
चंपत राय और जगद्गुरु परमहंसाचार्य की बंद कमरे में हुई महत्वपूर्ण बैठक
तपस्वी छावनी में प्रवास के दौरान चंपत राय ने महंत जगद्गुरु परमहंसाचार्य से भी मुलाकात की। मंदिर पहुंचने पर वैदिक आचार्यों ने मंत्रोच्चार के साथ उनका स्वागत किया। इसके बाद दोनों के बीच लगभग 30 मिनट तक बंद कमरे में चर्चा हुई।
बैठक के बाद चंपत राय ने अन्य संतों से भी मुलाकात की और धार्मिक विषयों पर विचार-विमर्श किया। हालांकि बंद कमरे में हुई बातचीत के विषय का आधिकारिक रूप से खुलासा नहीं किया गया।
संतों ने चंपत राय से अयोध्या में बने रहने का किया आग्रह
जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने कहा कि चंपत राय लंबे समय से अयोध्या आते रहे हैं और उनका राम मंदिर आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि चंपत राय के नेतृत्व और समर्पण ने राम मंदिर निर्माण के अभियान को नई दिशा दी।
परमहंसाचार्य ने कहा कि सभी संतों और सनातन समाज की ओर से चंपत राय से आग्रह किया गया कि वे अयोध्या न छोड़ें। उनके अनुसार चंपत राय के अनुभव और मार्गदर्शन की आवश्यकता भविष्य में भी बनी रहेगी।
चंपत राय ने संतों का सम्मान करते हुए दिया अयोध्या में रहने का वचन
संतों के आग्रह पर प्रतिक्रिया देते हुए चंपत राय ने कहा कि वह संत समाज के आदेश का सम्मान करते हैं और उसे टालना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि वह अपनी अंतिम सांस तक अयोध्या में ही रहेंगे।
उनके इस बयान को संत समाज ने स्वागतयोग्य बताया। धार्मिक नेताओं का मानना है कि चंपत राय की उपस्थिति राम मंदिर और अयोध्या से जुड़े विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी

