Madarsa Controversy: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों और वहां शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। उनके बयान के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है। इस बीच वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए बयान को सांप्रदायिक और आपत्तिजनक करार दिया।
कपिल सिब्बल का पलटवार, मदरसा विवाद के बीच राम मंदिर दान मामले का उठाया मुद्दा
कपिल सिब्बल ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में लिखा कि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री का यह कहना कि मदरसा शिक्षा देशभक्ति को बढ़ावा नहीं देती, एक गंभीर और विभाजनकारी टिप्पणी है। उन्होंने कहा कि यदि मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों को आतंकवादी सोच वाला बताया जा रहा है, तो फिर राम मंदिर के दान से जुड़ी कथित चोरी के आरोपों में शामिल लोगों को क्या देशभक्त माना जाएगा? सिब्बल ने इस सवाल के जरिए सरकार और भाजपा पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा।
मदरसा शिक्षा पर केशव प्रसाद मौर्य की टिप्पणी को बताया सांप्रदायिक बयान
अपने बयान में कपिल सिब्बल ने कहा कि केशव प्रसाद मौर्य की टिप्पणी एक सांप्रदायिक सोच को दर्शाती है और इस तरह के बयान संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए उचित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी निभाने वाले नेताओं से समाज को जोड़ने वाले विचारों की अपेक्षा की जाती है, न कि ऐसे बयानों की, जो सामाजिक तनाव बढ़ा सकते हैं। सिब्बल ने यह भी कहा कि देश इससे बेहतर राजनीतिक संवाद का हकदार है।
केशव प्रसाद मौर्य ने आखिर मदरसा शिक्षा को लेकर क्या कहा था?
विवाद की शुरुआत उस बयान से हुई, जिसमें केशव प्रसाद मौर्य ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि मदरसा शिक्षा प्राप्त करने वाले लोगों के भीतर “आतंकवादी जैसी सोच” विकसित हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोग न तो “भारत माता की जय” बोलते हैं और न ही “वंदे मातरम्” गाते हैं। मौर्य ने आगे दावा किया कि चाहे मदरसे भारत के हों या बांग्लादेश के, वे आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। उनके इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर विपक्षी दलों का हमला, सियासत हुई तेज
केशव प्रसाद मौर्य के मदरसा बयान के बाद समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) समेत कई विपक्षी दलों ने उनकी आलोचना की। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते हैं और धार्मिक आधार पर विभाजन पैदा करते हैं। वहीं, इस मुद्दे ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में इस बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

