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दिल्ली हाईकोर्ट से Dabur India को अंतरिम राहत, ‘100% शुद्ध’ और ‘100% प्राकृतिक’ दावों वाले उत्पादों की बिक्री पर फिलहाल नहीं लगेगी रोक

Dabur India: एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें कंपनी को ‘100% शुद्ध’, ‘100% प्राकृतिक’, ‘100% ऑर्गेनिक’ और इसी तरह के दावों वाले खाद्य उत्पादों की बिक्री बंद करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद डाबर फिलहाल अपने इन उत्पादों की बिक्री पहले की तरह जारी रख सकेगी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह अंतिम फैसला नहीं है और मामले की विस्तृत सुनवाई अभी बाकी है।

FSSAI का आदेश: ‘100% शुद्ध’ और ‘100% प्राकृतिक’ दावों पर क्यों उठी आपत्ति?

कुछ समय पहले FSSAI ने डाबर इंडिया को निर्देश दिया था कि वह ऐसे खाद्य उत्पादों की बिक्री रोक दे, जिनकी पैकेजिंग पर ‘100% शुद्ध’, ‘100% प्राकृतिक’, ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावे किए गए हैं। नियामक संस्था का कहना था कि ऐसे दावों को पूरी तरह वैज्ञानिक और कानूनी रूप से साबित करना कठिन होता है। FSSAI के अनुसार, इस तरह की मार्केटिंग भाषा उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकती है और खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत इसे भ्रामक विज्ञापन की श्रेणी में माना जा सकता है।

डाबर इंडिया की दलील: बिना नोटिस के कार्रवाई पर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

FSSAI के आदेश के खिलाफ डाबर इंडिया ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कंपनी का कहना था कि नियामक ने इतना महत्वपूर्ण आदेश जारी करने से पहले न तो कोई शो-कॉज नोटिस जारी किया और न ही कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। डाबर ने अदालत को बताया कि वह कई वर्षों से इन्हीं लेबल और दावों के साथ अपने उत्पाद बाजार में बेच रही है। ऐसे में बिना उचित प्रक्रिया अपनाए अचानक बिक्री रोकने का निर्देश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

दिल्ली हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश: ‘100% शुद्ध’ लेबल वाले उत्पादों की बिक्री पर फिलहाल रोक नहीं

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर की दलीलों पर विचार करते हुए FSSAI के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि जब तक इस मामले की अंतिम सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक कंपनी को राहत दी जाती है। इसका सीधा मतलब है कि फिलहाल डाबर अपने ‘100% शुद्ध’, ‘100% प्राकृतिक’ और अन्य समान दावों वाले उत्पादों की बिक्री जारी रख सकती है। हालांकि, कोर्ट का यह फैसला केवल अंतरिम राहत है और अंतिम निर्णय आगे की सुनवाई के बाद ही आएगा।

किन खाद्य उत्पादों पर विवाद: शहद, देसी घी और नारियल तेल समेत कई प्रोडक्ट शामिल

यह विवाद डाबर इंडिया के कई लोकप्रिय खाद्य उत्पादों से जुड़ा है। इनमें शहद, देसी घी, नारियल तेल और अन्य खाद्य उत्पाद शामिल हैं, जिनकी पैकेजिंग पर ‘100% शुद्ध’, ‘100% प्राकृतिक’ या इसी तरह के दावे किए गए हैं। FSSAI का मानना है कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता और प्रकृति को लेकर भ्रमित कर सकते हैं, इसलिए इनकी जांच और नियमन जरूरी है।

FSSAI का पक्ष: ‘100% प्राकृतिक’ और ‘100% शुद्ध’ जैसे दावे क्यों माने जा रहे हैं भ्रामक?

FSSAI का कहना है कि खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग पर ‘100%’ जैसे पूर्ण दावे करना कानूनी दृष्टि से संवेदनशील विषय है। नियामक के अनुसार, किसी भी खाद्य उत्पाद के बारे में ‘100% शुद्ध’ या ‘100% प्राकृतिक’ होने का दावा पूरी तरह प्रमाणित करना आसान नहीं होता। यदि ऐसे दावे पर्याप्त साक्ष्यों के बिना किए जाते हैं, तो इससे उपभोक्ताओं के गुमराह होने की आशंका बढ़ जाती है। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत ऐसे दावों पर सख्ती बरती जा रही है।

ग्राहकों और एफएमसीजी कंपनियों पर असर: अंतिम फैसले से तय होगी आगे की दिशा

फिलहाल इस अंतरिम आदेश का ग्राहकों पर कोई तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा। डाबर के जिन उत्पादों पर ‘100% शुद्ध’ या ‘100% प्राकृतिक’ जैसे दावे लिखे हैं, वे बाजार में पहले की तरह उपलब्ध रहेंगे। हालांकि, इस मामले में अंतिम फैसला आने के बाद खाद्य उद्योग की कई कंपनियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और विज्ञापन रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। यदि अदालत अंततः FSSAI के पक्ष में फैसला देती है, तो यह निर्णय पूरे एफएमसीजी सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है और भविष्य में ‘100%’ जैसे दावों के इस्तेमाल पर नए मानक तय हो सकते हैं।

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