Sajjan Kumar Death: पूर्व सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार का निधन हो गया है। उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया था, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। हालांकि, फिलहाल उनके निधन के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में मौत की वजह को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।
सज्जन कुमार की मौत की वजह अभी स्पष्ट नहीं, आधिकारिक जानकारी का इंतजार
सज्जन कुमार के निधन की खबर सामने आने के बाद उनके समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों में शोक की लहर है। फिलहाल अस्पताल की ओर से उनकी मौत के कारणों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार, उन्हें अस्पताल लाया गया था, लेकिन उस समय तक उनका निधन हो चुका था। हालांकि, इस संबंध में अंतिम और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।
लोकसभा सांसद के तौर पर लंबा राजनीतिक सफर रहा
सज्जन कुमार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे और उन्होंने लोकसभा सांसद के रूप में भी अपनी राजनीतिक भूमिका निभाई। दिल्ली की राजनीति में उनका लंबे समय तक प्रभाव रहा। हालांकि, उनके राजनीतिक जीवन के साथ 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़ा विवाद भी रहा। इन मामलों में उन्हें दोषी ठहराया गया था और वह अन्य दंगा मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे थे।
1984 सिख विरोधी दंगा मामलों में दोषी पाए गए थे सज्जन कुमार
सज्जन कुमार का नाम 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े कई मामलों में सामने आया था। इन मामलों में अदालतों में लंबे समय तक सुनवाई चली। उन्हें कुछ मामलों में दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई गई। इसी वजह से अलग-अलग मामलों में राहत मिलने के बावजूद वह जेल से बाहर नहीं आ सके थे।
जनकपुरी 1984 दंगा मामले में कोर्ट ने किया था बरी
1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े जनकपुरी मामले में सज्जन कुमार को अदालत से राहत मिली थी। राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें मामले में लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया था। विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष सज्जन कुमार की घटना स्थल पर मौजूदगी या उनकी संलिप्तता को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा।
जनकपुरी दंगा केस में हत्या, आगजनी और लूट के आरोप
यह मामला जनकपुरी थाने में दर्ज एफआईआर से संबंधित था। इसमें दंगों के दौरान गुरुद्वारे पर हमला, आगजनी, लूटपाट, हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर अपराधों के आरोप लगाए गए थे। मामला 1 नवंबर 1984 की घटना से जुड़ा था, जब जनकपुरी इलाके में एक भीड़ द्वारा सिख समुदाय के लोगों को निशाना बनाए जाने की शिकायत सामने आई थी।
शिकायतकर्ता हरविंदर सिंह ने सज्जन कुमार पर लगाए थे आरोप
मामले के शिकायतकर्ता हरविंदर सिंह ने 1985 में रंगनाथ मिश्रा आयोग के सामने हलफनामा दाखिल किया था। उनके अनुसार, घटना के दिन करीब 200 से 250 लोगों की भीड़ इलाके में पहुंची थी। शिकायत में दावा किया गया था कि भीड़ डीटीसी बस से आई थी और कुछ लोग सफेद तथा लाल कारों में सवार थे। बाद की जांच में हरविंदर सिंह का बयान भी दर्ज किया गया।
2016 में दर्ज हुआ बयान, 2022 में दाखिल हुई थी चार्जशीट
जांच के दौरान 2016 में पीड़ित हरविंदर सिंह का बयान दर्ज किया गया था। उन्होंने सज्जन कुमार को आरोपी के तौर पर नामित किया और कहा था कि वह उन्हें पहले से पहचानते थे। इसके बाद एसआईटी ने मामले से जुड़े चिकित्सा दस्तावेज, मृत्यु प्रमाणपत्र और तस्वीरों समेत कई साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया। वर्ष 2022 में सज्जन कुमार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।
सज्जन कुमार पर दंगा और साजिश समेत कई आरोप
चार्जशीट में सज्जन कुमार के खिलाफ दंगा, आगजनी, लूटपाट, हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश जैसे आरोप लगाए गए थे। हालांकि, जनकपुरी से जुड़े इस मामले में अदालत ने अभियोजन पक्ष के सबूतों को पर्याप्त नहीं माना और उन्हें आरोपों से बरी कर दिया। इसके बावजूद अन्य 1984 दंगा मामलों में मिली सजा के कारण उनकी जेल से रिहाई नहीं हो सकी थी।
सज्जन कुमार के निधन से राजनीतिक गलियारों में शोक
सज्जन कुमार के निधन की खबर के बाद राजनीतिक गलियारों में शोक का माहौल है। उनके लंबे राजनीतिक जीवन के साथ-साथ 1984 के सिख विरोधी दंगा मामलों से जुड़ा उनका कानूनी इतिहास भी चर्चा में रहा। फिलहाल उनके निधन के कारणों और अस्पताल से संबंधित आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद ही उनकी मृत्यु की परिस्थितियों को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

