One Nation One Election: हरिद्वार की श्रीजी वाटिका में आयोजित ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ कार्यक्रम में योग गुरु स्वामी रामदेव ने एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश में बार-बार होने वाली चुनावी प्रक्रिया का असर विकास योजनाओं और प्रशासनिक कामकाज पर पड़ता है। यदि एक साथ चुनाव की व्यवस्था लागू होती है तो शिक्षा सहित विकास के कई क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
वन नेशन वन इलेक्शन से शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद
स्वामी रामदेव ने कहा कि चुनावी ड्यूटी के कारण शिक्षकों का काफी समय चुनावी प्रक्रिया में चला जाता है। इससे स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होती है और शिक्षकों को बच्चों पर पर्याप्त ध्यान देने का समय नहीं मिल पाता। उनके मुताबिक, ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ लागू होने पर चुनावी ड्यूटी का बोझ कम हो सकता है और शिक्षक ज्यादा समय विद्यार्थियों को दे पाएंगे। इससे शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
बार-बार चुनाव से विकास योजनाओं पर पड़ता है असर
रामदेव ने कहा कि साल के कई महीने चुनावी गतिविधियों में निकल जाते हैं। चुनाव की प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक मशीनरी का बड़ा हिस्सा चुनावी तैयारियों और ड्यूटी में व्यस्त रहता है। उनका मानना है कि बार-बार चुनाव होने से विकास कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है। एक साथ चुनाव कराने से प्रशासन को लंबे समय तक विकास योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।
मतदाता केंद्र और राज्य में सरकार चुनने में सक्षम: रामदेव
वन नेशन वन इलेक्शन के समर्थन में अपनी बात रखते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि देश का मतदाता काफी समझदार है। उन्होंने कहा कि मतदाता यह तय करने में सक्षम है कि केंद्र और राज्य में किस राजनीतिक दल या उम्मीदवार को चुनना है। उनके अनुसार, एक साथ चुनाव होने से मतदाताओं के अधिकार और लोकतांत्रिक निर्णय लेने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर देशहित रखने की अपील
स्वामी रामदेव ने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए देशहित से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी इच्छा है कि भारत 2040 तक ही विकसित राष्ट्र बन जाए। रामदेव ने देश के विकास के लिए राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सकारात्मक सोच की जरूरत पर जोर दिया।
लोकतंत्र को हंगामे के जरिए बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए
रामदेव ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और आंदोलन के तरीकों को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को सड़क और संसद में हंगामा करके बंधक बनाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि किसी मुद्दे पर असहमति हो तो लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी जानी चाहिए। उन्होंने नाबालिग बच्चों को आंदोलनों में आगे करने पर भी आपत्ति जताई।
नाबालिग बच्चों को आंदोलनों से दूर रखने की अपील
स्वामी रामदेव ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ अन्याय हो रहा है तो 18 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा सकते हैं। उन्होंने बच्चों को राजनीतिक या सामाजिक आंदोलनों में इस्तेमाल किए जाने से बचाने की बात कही। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल जिम्मेदारी और संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर किया जाना चाहिए।
कंगना रनौत के बयान पर टिप्पणी करने से स्वामी रामदेव ने किया इनकार
कार्यक्रम के दौरान कंगना रनौत की ओर से की गई टिप्पणी को लेकर भी स्वामी रामदेव से सवाल पूछा गया। हालांकि, उन्होंने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। रामदेव ने कहा कि वह ऐसी किसी बात पर टिप्पणी नहीं करना चाहते जिससे विवाद और बढ़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को हवा देना नहीं, बल्कि सकारात्मक और देशहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना है।
वंदे मातरम को लेकर स्वामी रामदेव ने रखी अपनी बात
वंदे मातरम को लेकर पूछे गए सवाल पर स्वामी रामदेव ने कहा कि इसे देवी-देवताओं या मंदिर की पूजा से जोड़कर विवाद तलाशने के बजाय इसके भाव और सांस्कृतिक संदर्भ को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके लिए भारत माता ही दुर्गा, लक्ष्मी और विद्या का स्वरूप हैं। रामदेव के मुताबिक, भारत माता उनके लिए सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति, कर्तव्य और जीवन मूल्यों का प्रतीक हैं।
वंदे मातरम राष्ट्रभक्ति और भारत माता के सम्मान की अभिव्यक्ति
स्वामी रामदेव ने कहा कि वंदे मातरम भारत माता के प्रति सम्मान, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की भावना को व्यक्त करता है। उन्होंने इसके सांस्कृतिक महत्व को समझने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि राष्ट्र से जुड़े प्रतीकों को लेकर विवाद पैदा करने के बजाय उनके भावनात्मक और ऐतिहासिक संदर्भ को समझना चाहिए।
जाति और वर्ग के आधार पर भेदभाव पर जताई चिंता
कार्यक्रम में स्वामी रामदेव ने समाज में जाति और वर्ग के नाम पर होने वाले भेदभाव पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को उसकी जाति, वर्ग या सामाजिक पहचान के आधार पर अपमानित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने एससी, एसटी, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, ब्राह्मण या संन्यासी सहित सभी वर्गों के सम्मान की बात कही और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

