UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर रक्षाबंधन का त्योहार बच्चियों के साथ मनाया। इस दौरान निराश्रित और छोटी बच्चियों ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी और उनके माथे पर टीका लगाया। मुख्यमंत्री ने भी बच्चियों से आत्मीयता से मुलाकात की और उनके साथ सेल्फी लेते नजर आए। रक्षाबंधन के इस आयोजन में मुख्यमंत्री आवास का माहौल भावुक और खुशनुमा नजर आया।
रक्षाबंधन पर सीएम योगी ने बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा पर की बात
राखी बंधवाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छात्राओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब बेटियां डर के कारण स्कूल जाने से भी कतराती थीं, लेकिन अब परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब वह बेटियों को स्कूल जाते देखते हैं तो उन्हें बेहद खुशी होती है। उन्होंने बेटियों की शिक्षा को समाज और सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बताया।
स्कूल शिक्षा में बेटियों के साथ भेदभाव का सीएम योगी ने किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में बेटियों की शिक्षा को लेकर होने वाले भेदभाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले कई परिवारों के पास सीमित संसाधन होने के कारण बेटे की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाती थी। बेटे के लिए यूनिफॉर्म, जूते और दूसरी जरूरी चीजें जुटा दी जाती थीं, जबकि बेटियों को कई बार इन सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता था। इसका असर उनकी पढ़ाई और स्कूल जाने पर भी पड़ता था।
नंगे पैर स्कूल जाती बच्चियों को देखकर रुके थे मुख्यमंत्री योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में उस घटना को भी याद किया, जब मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने प्रदेश के कुछ जिलों का दौरा किया था। उन्होंने बताया कि अक्टूबर-नवंबर का समय था और सर्दियां शुरू हो रही थीं। इसी दौरान उन्होंने सुबह स्कूल जा रही कुछ बच्चियों को देखा। बच्चियों के कंधों पर छोटे और पुराने बैग थे। मुख्यमंत्री ने उनकी स्थिति देखकर अपनी गाड़ी रुकवाई और उनसे बातचीत की।
योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, उन्होंने बच्चियों से पूछा कि वे कहां जा रही हैं। बच्चियों ने जवाब दिया कि वे स्कूल जा रही हैं। जब मुख्यमंत्री ने उनसे यूनिफॉर्म के बारे में पूछा तो बच्चियां चुप हो गईं। इसके बाद उनकी नजर बच्चियों के पैरों पर गई। वे पथरीले रास्ते पर नंगे पैर स्कूल जा रही थीं। मुख्यमंत्री ने उनसे पूछा कि उनके पास चप्पल या जूते नहीं हैं, लेकिन बच्चियां इस सवाल पर भी कुछ नहीं बोल सकीं।
भाई के पास जूते और यूनिफॉर्म, बहन के पास कुछ नहीं
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने एक बच्ची से यह भी पूछा कि क्या वह परिवार की इकलौती संतान है। बच्ची ने बताया कि उसका एक भाई भी है, जो दूसरे स्कूल में पढ़ता है। जब मुख्यमंत्री ने उसके भाई के बारे में पूछा तो बच्ची ने बताया कि भाई के पास जूते और यूनिफॉर्म हैं।
बच्ची की बात सुनकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्थिति उनके लिए सोचने वाली थी। उन्होंने उसी दिन लखनऊ लौटकर अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश की बेटियों को स्कूल जाने के लिए जरूरी सुविधाओं से वंचित न रहना पड़े।
बेटियों के लिए यूनिफॉर्म, बैग और जूते-मोजे की व्यवस्था का फैसला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि इसके बाद सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बेटियों के लिए दो यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, किताबें, जूते-मोजे और सर्दियों के मौसम में स्वेटर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। उनका कहना था कि आर्थिक स्थिति किसी बेटी की शिक्षा में बाधा नहीं बननी चाहिए।
रक्षाबंधन के मौके पर मुख्यमंत्री ने बेटियों की शिक्षा और उनके सम्मान को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि बेटियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर वातावरण देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। रक्षाबंधन के इस आयोजन में राखी बांधने आई बच्चियों के साथ मुख्यमंत्री का संवाद इसी संदेश पर केंद्रित रहा कि प्रदेश की हर बेटी को शिक्षा और आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए।

