India Russia Trade: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-रूस के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने पर चर्चा की। बैठक को दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों की दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
पीएम मोदी ने भारत मंडपम में पुतिन का किया गर्मजोशी से स्वागत
भारत मंडपम पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और एक-दूसरे को गले लगाया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को तमिल साहित्य के प्रसिद्ध प्राचीन नीति ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी संस्करण भी भेंट किया।
तिरुक्कुरल के रूसी संस्करण की खासियत
तिरुक्कुरल तमिल साहित्य का एक प्राचीन और महत्वपूर्ण नीति ग्रंथ है, जिसे संक्षेप में ‘कुरल’ भी कहा जाता है। इसमें मानव जीवन, नैतिकता और सामाजिक आचरण से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश दिए गए हैं। ग्रंथ में कुल 1,330 कुरल यानी छोटे दोहे हैं और प्रत्येक कुरल सात शब्दों से बना है।
तिरुक्कुरल को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है। इनमें सदाचार और नैतिकता, धन एवं जीवन-व्यवहार तथा प्रेम से संबंधित सूत्रात्मक शिक्षाएं शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से इसका रूसी संस्करण भेंट किया जाना भारत की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को रूस के साथ साझा करने का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जा रहा है।
भारत-रूस संबंधों में रक्षा, ऊर्जा और तकनीक पर फोकस
मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, औषधि और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों को आर्थिक और तकनीकी सहयोग के नए क्षेत्रों तक ले जाने पर भी चर्चा हो सकती है।
भारत-रूस व्यापार को वर्ष 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी वार्ता के प्रमुख मुद्दों में शामिल बताया जा रहा है। व्यापार बढ़ाने के साथ दोनों देशों के बीच निवेश और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर भी जोर दिए जाने की उम्मीद है।
ब्रह्मोस मिसाइल और एस-400 को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इससे पहले कहा था कि भारत और रूस ब्रह्मोस मिसाइल को उन्नत करने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। रूस ने भारत को शेष एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों की आपूर्ति पूरी करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
इसके अलावा रूस के सुखोई-57 लड़ाकू विमानों की संभावित आपूर्ति को लेकर भी दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। ऐसे में मोदी-पुतिन वार्ता के दौरान रक्षा क्षेत्र में भविष्य के सहयोग और सैन्य तकनीक से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परमाणु ऊर्जा और ऊर्जा सहयोग पर भी होगी बातचीत
भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग पहले से मजबूत रहा है। रूसी अधिकारियों के अनुसार, भारत में नए असैन्य परमाणु रिएक्टरों की स्थापना की योजना को लेकर भी दोनों पक्ष बातचीत कर सकते हैं। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना दोनों देशों के दीर्घकालिक रणनीतिक और ऊर्जा संबंधों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
यूक्रेन युद्ध पर मोदी के रुख की भी रहेगी चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन इससे पहले पिछले सप्ताह बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से इतर भी मिले थे। उस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन संघर्ष को तत्काल समाप्त करने की अपील की थी।
पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति से ‘अंतहीन युद्ध से युद्ध के अंत की ओर’ बढ़ने का आग्रह किया था। ऐसे में नई दिल्ली में हुई ताजा मुलाकात को भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के साथ-साथ वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेताओं की बातचीत से रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और कूटनीतिक सहयोग को लेकर आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

