UP Politics: कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने अपनी पैदाइश को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता ओम प्रकाश सिंह की कथित टिप्पणी पर तीखा पलटवार किया है। राजभर ने सोशल मीडिया पर ओम प्रकाश सिंह को ‘मित्र’ कहकर संबोधित करते हुए कहा कि पिछले दो दिनों से उनका बयान सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि बयान सुनकर उन्हें हैरानी नहीं हुई, बल्कि ओम प्रकाश सिंह पर तरस आया।
राजभर बोले- गरीब राजभर समाज में पैदा होना मेरे लिए गर्व की बात
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि उनकी पैदाइश को लेकर टिप्पणी इसलिए की गई, क्योंकि उनका जन्म किसी जमींदार या ऊंची जाति के परिवार में नहीं, बल्कि बेहद गरीब और असहाय राजभर समाज में हुआ। उन्होंने कहा कि उन्हें राजभर समाज में पैदा होने का कभी अफसोस नहीं रहा। इसके उलट उन्हें इस बात पर गर्व है कि जिस समाज में उनका जन्म हुआ, उसके लिए कुछ करने की नीयत और हौसला उनके भीतर है।
राजभर ने कहा कि समाज और व्यक्ति की पहचान जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्मों से होती है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का उद्देश्य पिछड़े और वंचित वर्गों की आवाज उठाना बताया।
‘मैं भी अनर्गल टिप्पणी कर सकता हूं, लेकिन संस्कार इसकी इजाजत नहीं देते’
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि वह भी चाहें तो ओम प्रकाश सिंह के खिलाफ अनर्गल टिप्पणियां कर सकते हैं, लेकिन उनके संस्कार इसकी इजाजत नहीं देते। उन्होंने कहा कि छोटी जाति में पैदा होने के बावजूद राजभर समाज ने उन्हें किसी व्यक्ति के माता-पिता के बारे में गलत बयानबाजी करना नहीं सिखाया।
ओम प्रकाश राजभर ने ओम प्रकाश सिंह के माता-पिता को प्रणाम करते हुए कहा कि कोई व्यक्ति यह तय नहीं करता कि उसका जन्म कब, कहां, किस कुल या किस जाति में होगा। उनके मुताबिक यह निर्णय परमात्मा का होता है।
सपा पर राजभर का बड़ा सियासी हमला, भगवान राम का भी किया जिक्र
अपनी प्रतिक्रिया में राजभर ने समाजवादी पार्टी और ओम प्रकाश सिंह पर भी राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद कुछ लोग ईश्वर को नहीं मानते। अगर वे ईश्वर में विश्वास रखते होते तो कथित तौर पर भगवान राम, रघुकुल, सूर्यवंश और सनातन का अपमान करने वाली समाजवादी पार्टी में विधानसभा का टिकट पाने के लिए अपमान का घूंट पीकर नहीं पड़े रहते।
राजभर के इस बयान को आगामी राजनीतिक समीकरणों और पिछड़े वर्ग की राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी पर व्यक्तिगत टिप्पणी के जवाब में सामाजिक सम्मान और राजनीतिक विचारधारा का मुद्दा उठाया।
कर्म में विश्वास, पिछड़ों और दलितों की आवाज उठाने का दावा
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि वह कर्म करने में विश्वास रखते हैं और कर्म के फल की चिंता नहीं करते। उन्होंने कहा कि राजभर समाज के साथ-साथ पिछड़ों, दलितों और शोषित वर्गों की आवाज को मजबूती से उठाने का उन्होंने संकल्प लिया है।
उन्होंने कहा कि वह इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। राजभर ने स्पष्ट किया कि उनके लिए समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के हितों की लड़ाई राजनीतिक प्राथमिकता है।
‘सपा का टिकट चाहिए तो ले लीजिए, जनता सब देख रही है’
सपा नेता ओम प्रकाश सिंह पर तंज कसते हुए राजभर ने कहा कि अगर उन्हें समाजवादी पार्टी का टिकट चाहिए तो वह जरूर लें। उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है। जनता उन्हें भी देख रही है और उनकी पार्टी को भी। समय आने पर इसका परिणाम भी जनता ही तय करेगी।
राजभर के इस बयान को सीधे तौर पर राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से आगे अंतिम फैसला चुनाव में जनता के हाथ में होगा।
माफी की उम्मीद नहीं, लेकिन माता-पिता को याद करने की अपील
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि ओम प्रकाश सिंह अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगेंगे और न ही वह उनसे माफी की अपेक्षा कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने उनसे अपील की कि एक बार अपने माता-पिता को याद करके जरूर विचार करें कि किसी व्यक्ति की पैदाइश और उसकी जाति को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना उचित है या नहीं।
राजभर ने कहा कि किसी व्यक्ति के जन्म को लेकर टिप्पणी करना उसके नियंत्रण में नहीं होता। इसलिए इस तरह के मुद्दों पर सामाजिक संवेदनशीलता और मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।
‘ईश्वर उनका भला करे’, जय श्रीराम के साथ खत्म की पोस्ट
ओम प्रकाश राजभर ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के अंत में कहा कि बाकी ईश्वर ओम प्रकाश सिंह का भला करे। उन्होंने अपनी पोस्ट का समापन ‘जय श्रीराम’ के साथ किया।
राजभर की इस प्रतिक्रिया के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा और सुभासपा के बीच बयानबाजी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पैदाइश और जाति से जुड़े कथित बयान के जवाब में राजभर ने सामाजिक सम्मान, पिछड़ों-दलितों की राजनीति और सपा पर अपने सियासी हमले को एक साथ सामने रखा है।

