Ayodhya News: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन को लेकर उठे सवालों के बीच विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी और आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर द्वारा पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय के एक पॉडकास्ट का हवाला देकर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने के बाद अब राजेश पांडेय ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सिलसिलेवार पोस्ट और पॉडकास्ट के वीडियो क्लिप साझा कर कहा कि उनके बयानों को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।
राम मंदिर CEO चयन विवाद पर राजेश पांडेय का स्पष्टीकरण
राजेश पांडेय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी आधिकारिक तौर पर यह दावा नहीं किया कि वह राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के टॉप-3 उम्मीदवारों में शामिल थे। उनके मुताबिक पॉडकास्ट में भी उन्होंने इस तरह की कोई बात नहीं कही थी। उन्होंने बताया कि उम्मीदवारों के पैनल से संबंधित जो चर्चा उनके सामने आई थी, वह उन्हें किसी आधिकारिक माध्यम से नहीं बल्कि अखबारों और सोशल मीडिया के जरिए मिली थी।
‘टॉप 3 उम्मीदवार’ की जानकारी आधिकारिक स्रोत से नहीं मिली
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा कि उन्होंने अपने पॉडकास्ट में इस बात को स्पष्ट किया था कि ट्रस्ट की ओर से उन्हें उम्मीदवारों की सूची या चयन प्रक्रिया को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई थी। ऐसे में उनके बयान को आधार बनाकर CEO चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
जितेंद्र मिश्रा के इंटरव्यू को लेकर भी दी सफाई
राम मंदिर ट्रस्ट के नवनियुक्त CEO और सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को लेकर सोशल मीडिया में चल रही चर्चाओं पर भी राजेश पांडेय ने स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने उस दावे को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया, जिसमें कहा जा रहा था कि जितेंद्र मिश्रा CEO पद के लिए इंटरव्यू देने ही नहीं पहुंचे थे।
‘इंटरव्यू नहीं हुआ’ वाली बात को बताया फेक
राजेश पांडेय ने कहा कि उन्होंने केवल अपने निर्धारित इंटरव्यू स्लॉट के दौरान जितेंद्र मिश्रा को वहां नहीं देखा था। उनका कहना था कि 11 अगस्त को जिस समय उनका इंटरव्यू स्लॉट था, उस दौरान उन्हें सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा वहां दिखाई नहीं दिए। लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं था कि जितेंद्र मिश्रा का इंटरव्यू हुआ ही नहीं।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट किया कि उनके बयान को इस तरह पेश करना कि उन्होंने जितेंद्र मिश्रा के इंटरव्यू में शामिल न होने की पुष्टि की थी, पूरी तरह गलत और भ्रामक है।
अमिताभ ठाकुर के पत्र के बाद बढ़ा राम मंदिर CEO विवाद
यह पूरा मामला तब चर्चा में आया जब आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने सोमवार को राजेश पांडेय के पॉडकास्ट का हवाला देते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पत्र भेजा। पत्र में उन्होंने CEO चयन की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे।
CEO चयन के आधार पर उठाए गए थे सवाल
अमिताभ ठाकुर ने अपने पत्र में दावा किया था कि यदि सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा कथित तौर पर टॉप-16 उम्मीदवारों में शामिल नहीं थे और इंटरव्यू में भी उपस्थित नहीं हुए, तो फिर उनका चयन CEO पद के लिए किस आधार पर किया गया।
पत्र सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर राम मंदिर ट्रस्ट के CEO चयन को लेकर बहस तेज हो गई। राजेश पांडेय के पॉडकास्ट के अंशों को अलग-अलग दावों के साथ साझा किया जाने लगा।
राजेश पांडेय के बयान से विवाद को मिला नया मोड़
अब राजेश पांडेय के स्पष्टीकरण के बाद पूरे मामले की तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। उन्होंने दोनों प्रमुख दावों से खुद को अलग करते हुए कहा है कि न तो उन्होंने अपने टॉप-3 उम्मीदवार होने का कोई आधिकारिक दावा किया था और न ही उन्होंने यह कहा था कि जितेंद्र मिश्रा CEO पद के इंटरव्यू में शामिल नहीं हुए।
सोशल मीडिया पर बयानों के संदर्भ को लेकर सवाल
राजेश पांडेय के स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट हुआ कि उनके अनुसार पॉडकास्ट में कही गई बातों को उनके मूल संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया गया। अब इस मामले में आगे राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं, इस पर भी नजर बनी हुई है। फिलहाल राजेश पांडेय के स्पष्टीकरण ने CEO चयन को लेकर चल रही चर्चाओं में एक नया मोड़ ला दिया है।

