लखनऊ: उत्तर प्रदेश में हादसों या अन्य कारणों से घायल होने वाले गोवंश को अब जल्द उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार नई व्यवस्था तैयार कर रही है। योगी सरकार प्रदेश के हर जिले में गोवंश के लिए आपातकालीन बचाव और त्वरित उपचार व्यवस्था विकसित करने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य दुर्घटनाओं में घायल गोवंश को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और उनकी बेहतर देखभाल सुनिश्चित करना है।
योगी सरकार का Cow Protection Plan, पंचगव्य चिकित्सा पर शोध को बढ़ावा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोवंश संरक्षण और स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान, मथुरा तथा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, लखनऊ में पंचगव्य आधारित चिकित्सा की संभावनाओं पर शोध और अनुसंधान को गति देने की बात कही गई है।
मुख्यमंत्री से सरकारी आवास पर हुई बैठक में गो सेवा आयोग के अध्यक्ष और पदाधिकारियों ने गोवंश संरक्षण, गोशालाओं के प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य और भविष्य की कार्ययोजना से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
गोशालाओं के निरीक्षण पर CM योगी का फोकस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोशालाओं में गोवंश के लिए उपलब्ध सुविधाओं की नियमित और प्रभावी निगरानी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि निरीक्षण का उद्देश्य केवल कमियां तलाशना नहीं होना चाहिए, बल्कि सामने आने वाली समस्याओं का तय समयसीमा में समाधान भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
गोशालाओं में पर्याप्त भरण-पोषण, साफ-सफाई, हरे चारे और भूसे की उपलब्धता, पेयजल तथा आश्रय व्यवस्था की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। बीमार और कमजोर गोवंश की विशेष देखभाल पर भी जोर दिया गया है।
लम्पी और खुरपका-मुंहपका से बचाव पर जोर
गोवंश को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए मुख्यमंत्री ने लम्पी और खुरपका-मुंहपका रोग के खिलाफ समयबद्ध टीकाकरण अभियान और तत्काल उपचार सुनिश्चित करने को कहा। लापरवाही सामने आने पर संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में गोशालाओं के निरीक्षण को अधिक परिणाममुखी बनाने और वैज्ञानिक प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर भी चर्चा हुई। नर, मादा, युवा और बीमार गोवंश की जरूरत के अनुसार अलग-अलग देखभाल व्यवस्था विकसित करने पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई।
गोबर और गोमूत्र से रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने की भी योजना पर चर्चा हुई। इसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), किसानों और गोपालकों को गोबर तथा गोमूत्र आधारित उत्पादों के निर्माण, पैकेजिंग, मूल्यवर्धन और मार्केटिंग से जोड़ने का प्रस्ताव है।
इन गतिविधियों के जरिए जैविक खाद, जीवामृत, बीजामृत, प्राकृतिक कीट नियंत्रक और बायोगैस जैसे उत्पादों को बढ़ावा देने की योजना है। इससे गोपालकों और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर विकसित करने पर जोर दिया गया।
निराश्रित गोवंश योजना में कैटल शेड और बायोगैस की सुविधा
गो सेवा आयोग ने मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत किसानों और गोपालकों की भागीदारी बढ़ाने का सुझाव दिया। आयोग ने 10 गोवंश रखने वाले लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर कैटल शेड, बायोगैस प्लांट और यूरिन टैंक जैसी सुविधाओं से जोड़ने की बात कही।
इसके साथ ही वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने, गोचर और चारागाह क्षेत्रों का विकास करने तथा स्थानीय किसानों के माध्यम से चारा उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
Cow Protection और किसान आय बढ़ाने की योजना
सरकार की प्रस्तावित योजना में गोवंश संरक्षण को केवल पशु कल्याण तक सीमित रखने के बजाय इसे किसानों और ग्रामीण परिवारों की आय से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है। गोबर और गोमूत्र से बनने वाले जैविक एवं कृषि उपयोगी उत्पादों के निर्माण और बिक्री के लिए स्थानीय स्तर पर समूहों और संगठनों को प्रोत्साहित करने की योजना है।
बैठक में चर्चा किए गए इन उपायों के जरिए गोशालाओं के प्रबंधन, गोवंश के स्वास्थ्य, किसानों की भागीदारी और ग्रामीण रोजगार—इन सभी क्षेत्रों को एक साथ मजबूत करने पर जोर दिया गया। सरकार की प्रस्तावित व्यवस्थाएं लागू होने के बाद प्रदेश में घायल और निराश्रित गोवंश के लिए त्वरित सहायता तथा संरक्षण व्यवस्था को और व्यवस्थित करने का लक्ष्य है।

