UP Panchayat Elections: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है। इस पर पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि सरकार हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करती है और पहले फैसले की कॉपी लेकर उसका अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद मौजूदा हालात को देखते हुए आगे का फैसला लिया जाएगा।
तीन महीने में चुनाव कराने के आदेश पर क्या बोले ओम प्रकाश राजभर?
पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार अदालत के आदेश का सम्मान करती है। जल्द ही हाईकोर्ट के फैसले की कॉपी लेकर उसका अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस समय विधानसभा चुनाव, जनगणना और यूपी बोर्ड की परीक्षाएं भी होनी हैं। ऐसे में इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आगे उचित कदम उठाया जाएगा।
राजभर के बयान से साफ है कि सरकार पहले कोर्ट के आदेश और उससे जुड़ी कानूनी स्थिति को समझना चाहती है। हालांकि, पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर अभी अंतिम कार्यक्रम सामने आना बाकी है।
प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल पूरा, प्रशासक संभाल रहे जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 मई को खत्म होने के बाद उन्हें प्रशासक के तौर पर जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद जुलाई में ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल भी पूरा हो गया। इन पदों पर भी प्रशासकों के जरिए कामकाज जारी रखा गया।
अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को लेकर सरकार और संबंधित विभागों की अगली कार्रवाई पर नजर है। अदालत ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक के तौर पर काम करते रहने की अनुमति भी दी है। यानी चुनाव होने तक पंचायतों का प्रशासनिक कामकाज जारी रह सकता है।
मतदाता सूची जारी, चुनाव की तैयारियां कहां तक पहुंचीं?
पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग मतदाता सूची जारी कर चुका है। दी गई जानकारी के मुताबिक, मतदाता सूची 10 जून को जारी की गई थी और चुनाव की तैयारियां काफी हद तक पूरी बताई जा रही हैं।
हालांकि, चुनाव कराने के लिए सिर्फ मतदाता सूची तैयार होना ही काफी नहीं है। सीटों पर आरक्षण तय करने और दूसरी जरूरी प्रक्रियाओं को भी पूरा करना होगा। इसी वजह से अब ओबीसी आरक्षण आयोग की रिपोर्ट को अहम माना जा रहा है।
पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट का इंतजार
उत्तर प्रदेश सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी का आरक्षण तय करने के लिए 20 मई को राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया था। आयोग का छह महीने का कार्यकाल नवंबर में पूरा होने की जानकारी दी गई है। फिलहाल उसकी रिपोर्ट का इंतजार है।
ओबीसी आरक्षण तय होने के बाद ही पंचायत चुनाव की सीटों पर आरक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देने का रास्ता साफ हो सकता है। ऐसे में हाईकोर्ट के तीन महीने के आदेश और आरक्षण की प्रक्रिया के बीच सरकार को आगे की रणनीति तय करनी होगी।
पंचायत चुनाव टालने के मामले में अदालत ने क्या कहा?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है। साथ ही अदालत ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने के फैसले को सही ठहराते हुए उन्हें इस भूमिका में काम जारी रखने की अनुमति दी है।
पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट की प्रधान पीठ और लखनऊ खंडपीठ में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इन सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़कर सुनवाई की गई। न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने इस मामले में आदेश दिया।
सरकार ने परिसीमन का दिया था हवाला
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से परिसीमन का हवाला देते हुए चुनाव टालने की दलील दी गई थी। याचिका में उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 12(3-ए) के तहत चुनाव टालने और ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में काम करते रहने की अनुमति देने वाले 25 और 26 मई के आदेशों को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं ने प्रेम लाल पटेल मामले का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2000 में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच इस धारा को संविधान के अनुच्छेद 243ई और 243के के खिलाफ मानते हुए असंवैधानिक करार दे चुकी है।
अब आगे क्या होगा?
अब पंचायत चुनाव को लेकर सबसे अहम सवाल यह है कि सरकार हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक आगे की प्रक्रिया किस तरह पूरी करती है। एक तरफ तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का आदेश है, तो दूसरी तरफ ओबीसी आरक्षण की रिपोर्ट, सीटों का आरक्षण और अन्य प्रशासनिक तैयारियां बाकी हैं।
ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि सरकार पहले आदेश का अध्ययन करेगी और फिर मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखकर उचित कदम उठाएगी। ऐसे में पंचायत चुनाव की तारीखों और आगे की प्रक्रिया को लेकर सरकार के अगले फैसले पर सबकी नजर रहेगी।

