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Sonam Wangchuk का चीन को दो टूक जवाब, लद्दाख के वादों पर केंद्र सरकार से भी नाराजगी

Sonam Wangchuk: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लद्दाख को लेकर चीन के बयान पर कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग की टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि चीन को लद्दाख के बारे में बोलने का कोई अधिकार नहीं है। वांगचुक ने इस मुद्दे पर एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें उन्होंने चीन के साथ-साथ भारत सरकार पर भी सवाल उठाए।

चीन के बयान पर सोनम वांगचुक का पलटवार, लद्दाख को लेकर कही बड़ी बात

वांगचुक ने कहा कि दो दिन पहले चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बयान दिया था कि चीन लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में मान्यता नहीं देता। इस बयान के बाद कई पत्रकारों ने उनसे प्रतिक्रिया मांगी थी। वांगचुक ने कहा कि चीन को लद्दाख के बारे में टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने पलटकर कहा कि अगर चीन लद्दाख को मान्यता नहीं देता, तो लद्दाख के लोग भी चीन को मान्यता नहीं देते।

सोनम वांगचुक ने तिब्बत का मुद्दा उठाया, चीन की कड़ी निंदा की

वांगचुक ने कहा कि लद्दाख का पड़ोसी देश चीन नहीं, बल्कि तिब्बत है। उन्होंने चीन से सवाल किया कि वह तिब्बत कब खाली करेगा और तिब्बत को उसके लोगों को कब सौंपेगा। उन्होंने बताया कि लेह अपेक्स बॉडी के नेताओं ने भी चीन के बयान के खिलाफ प्रेस वार्ता की और उसकी कड़ी निंदा की।

वांगचुक ने कहा कि लद्दाख के लोग भारत में हमेशा खुश रहे हैं और आगे भी भारत के साथ रहना चाहते हैं। उनके मुताबिक, चीन की बयानबाजी लद्दाख के लोगों की भावनाओं के खिलाफ है।

केंद्र सरकार से लद्दाख के वादों पर सोनम वांगचुक नाराज

चीन को जवाब देने के साथ ही वांगचुक ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने लद्दाख के नेताओं और गृह मंत्रालय के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि बैठक से लोगों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन वहां की चर्चा से वे निराश होकर लौटे।

वांगचुक ने कहा कि चीन तो दुश्मन देश है, लेकिन अपने ही देश की सरकार से ऐसी निराशा मिलना ज्यादा दुखद है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा, “हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में क्या दम था।” उनके मुताबिक, लद्दाख के लोगों को लगा था कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाएगी, लेकिन बैठक में उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं निकले।

लद्दाख को छठी अनुसूची और लोकतंत्र का भरोसा

वांगचुक ने कहा कि 2019 में लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। उस समय लोगों को भरोसा दिलाया गया था कि आगे चलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत की जाएगी और लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों ने इन आश्वासनों के आधार पर चुनावों में भी हिस्सा लिया, लेकिन अब सरकार अपने वादों से पीछे हटती दिख रही है।

विधानसभा, धारा 371 और संवैधानिक सुरक्षा पर वांगचुक की चिंता

वांगचुक के मुताबिक, हाल की बैठक में लद्दाख को विधानसभा देने की बात तो कही गई, लेकिन उसका अधिकार सीमित रखने की चर्चा हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य सचिव को विधानसभा के अधीन लाने और धारा 371 से जुड़े आश्वासनों पर भी सरकार का रुख उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।

उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोग इस रवैये से दुखी और नाराज हैं। वांगचुक ने सवाल उठाया कि जब अपने ही देश की सरकार लोगों की मांगों और भावनाओं को समझने के लिए तैयार नहीं दिखती, तो वे अपनी बात लेकर कहां जाएं।

लद्दाख के अधिकारों पर केंद्र से जवाब चाहते हैं सोनम वांगचुक

वांगचुक ने कहा कि लद्दाख के लोग देश के साथ खड़े रहे हैं और सीमाओं की रक्षा में भी अपना योगदान देते आए हैं। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि केंद्र सरकार उनकी लोकतांत्रिक और संवैधानिक मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी।

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