UP politics: दिल्ली में आयोजित संवैधानिक सुरक्षा अधिकार महासम्मेलन में निषाद पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने आरक्षण की मांग को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि 2013 से 2026 तक निषाद पार्टी का सफर शानदार रहा है और अब पार्टी अपने अधिकारों के लिए पीछे हटने वाली नहीं है।
संजय निषाद ने कहा, “अब हम सिर्फ नाव नहीं, चुनाव वाले हैं। मछुआरों को आरक्षण देना ही पड़ेगा, बीजेपी भी समझ ले।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आरक्षण लागू नहीं किया गया तो बीजेपी को भी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जिस किसी ने निषाद समाज को धोखा दिया, उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है। उनके भाषण का मुख्य मुद्दा मछुआरा समाज को आरक्षण दिलाना रहा।
बीजेपी, सपा और बसपा पर संजय निषाद ने क्या कहा?
संजय निषाद ने दावा किया कि आज गांव-गांव में निषाद पार्टी का झंडा दिखाई दे रहा है और प्रदेश के कई राजनीतिक दल निषाद समाज को अपने साथ जोड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस भी निषाद समाज को टिकट देने की बात कर रही हैं, लेकिन उनकी पार्टी के लिए सबसे बड़ा मुद्दा आरक्षण है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी हो या समाजवादी पार्टी, सभी निषाद पार्टी को साथ लेकर चलने की बात करते हैं। हालांकि, गठबंधन या समर्थन को लेकर फैसला आरक्षण के मुद्दे पर ही होगा। संजय निषाद ने साफ किया कि आरक्षण पर बात किए बिना किसी राजनीतिक दल से समझौता नहीं किया जाएगा। उनके इस बयान को आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
‘जय निषादराज वाले भी अपना हक लेकर रहेंगे’
महासम्मेलन में संजय निषाद ने अपने समाज के अधिकारों की तुलना दूसरे सामाजिक आंदोलनों से करते हुए कहा कि अब निषाद समाज भी अपना हक लेकर रहेगा। उन्होंने कहा, “जय भीम वालों ने आरक्षण लागू करवा लिया, अब जय निषादराज वाले भी अपना हक लेकर रहेंगे। दिल्ली दूर नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल महासम्मेलन में पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी पहुंचे हैं। अगर पूरा समाज दिल्ली की ओर कूच करने का फैसला करता है, तो इसका असर कितना बड़ा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उनके इस बयान से साफ है कि पार्टी आरक्षण की मांग को लेकर आगे भी आंदोलन का रास्ता अपना सकती है।
‘हमें राशन नहीं, शासन चाहिए’, संजय निषाद ने दिया नया नारा
संजय निषाद ने अपने संबोधन में कहा कि निषाद समाज को केवल सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं चाहिए, बल्कि शासन और सत्ता में भी उसकी भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें राशन नहीं, शासन चाहिए।” इसके साथ ही उन्होंने आरक्षण की मांग को लेकर नारा दिया, “आरक्षण मिले तो शांति, नहीं तो होगी क्रांति।”
उन्होंने कहा कि उनका समाज राष्ट्रवादी है और अब अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है। संजय निषाद ने दूसरे समुदायों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब दूसरे समाज अपने अधिकार हासिल कर सकते हैं, तो निषाद समाज को भी उसका हक मिलना चाहिए।
निषाद समाज की बेटियों की सुरक्षा और अधिकारों पर भी जोर
महासम्मेलन के दौरान संजय निषाद ने समाज की बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे समाज के अधिकारों के लिए एकजुट रहें और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं।
उन्होंने कहा कि निषाद समाज को आरक्षण के साथ-साथ सामाजिक सम्मान और राजनीतिक भागीदारी भी चाहिए। महासम्मेलन में संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा और मछुआरा समाज को आरक्षण देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। अब देखना होगा कि संजय निषाद की इस चेतावनी के बाद बीजेपी और दूसरे राजनीतिक दल आरक्षण के मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।

