Varanasi Air Show 2026: वाराणसी में आयोजित एयर शो का रोमांच देखने के लिए शनिवार को गंगा के दोनों किनारों पर लोगों की भारी भीड़ जुटी। नमो घाट पर लड़ाकू विमानों की गर्जना और हैरतअंगेज करतब देखने के लिए गंगा पार करीब पांच किलोमीटर के दायरे में बने दर्शक स्थलों पर लगभग पांच लाख लोग पहुंचे। बहादुरपुर से कटेसर तक गंगा किनारे सुबह से ही लोगों की भीड़ नजर आई।
राफेल, सुखोई और तेजस जैसे लड़ाकू विमानों को आसमान में उड़ते देखने का उत्साह लोगों में साफ दिखाई दिया। कई लोग 60 से 110 किलोमीटर तक का सफर तय करके वाराणसी पहुंचे। चंदौली के अलावा आजमगढ़, मऊ, सोनभद्र और बिहार के कैमूर व रोहतास से भी लोग एयर शो देखने आए।
राजघाट पुल बंद होने से लोगों को हुई परेशानी
एयर शो के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए राजघाट पुल पर सुबह आठ बजे से ही यातायात बंद कर दिया गया था। इससे गंगा पार आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दूसरी तरफ, काशी की ओर घाटों पर भी एयर शो देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। आयोजकों और प्रशासन की ओर से दूसरे दिन पहले दिन के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा भीड़ जुटने का अनुमान लगाया गया था।
पहले दिन नमो घाट के सामने अवधूत भगवान राम घाट की ओर दर्शकों की संख्या ज्यादा थी, लेकिन दूसरे दिन बहादुरपुर से कटेसर तक पूरे पांच किलोमीटर के इलाके में लोगों की भीड़ दिखाई दी। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सुबह से ही अपने लिए अच्छी जगह तलाशने में जुट गए थे।
राफेल की आवाज सुनते ही आसमान की ओर उठीं निगाहें
जैसे ही आसमान में लड़ाकू विमानों की गर्जना सुनाई देती, गंगा किनारे खड़े लोगों की नजरें ऊपर उठ जातीं। हर कोई अपने मोबाइल कैमरे में विमानों की उड़ान और उनकी कलाबाजियों को कैद करना चाहता था। लोगों के बीच इस खास पल को रिकॉर्ड करने की होड़ लगी रही।
एसपी आकाश पटेल ने बताया कि एयर शो को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पहले दिन के मुकाबले दूसरे दिन करीब तीन गुना ज्यादा लोग कार्यक्रम देखने पहुंचे।
वाराणसी एयर शो में तीन पीढ़ियों ने साथ देखा विमानों का करतब
एयर शो का रोमांच सिर्फ बच्चों और युवाओं तक सीमित नहीं रहा। डोमरी में गंगा किनारे एक ऐसा परिवार भी पहुंचा, जिसमें दादी से लेकर पोते-पोतियों तक तीन पीढ़ियों ने एक साथ लड़ाकू विमानों की उड़ान का आनंद लिया।
मंजू देवी अपने बेटे, बहू और पोता-पोती के साथ एयर शो देखने आई थीं। परिवार के सभी सदस्यों ने साथ बैठकर आसमान में विमानों के करतब देखे। आमतौर पर घर के अलग-अलग सदस्य अपने कामों में व्यस्त रहते हैं, लेकिन इस कार्यक्रम ने उन्हें एक साथ समय बिताने और यादगार पल बनाने का मौका दिया।
80 साल के अजीमुल्लाह ने पूरी की एयर शो देखने की अधूरी हसरत
वाराणसी एयर शो देखने का जुनून 80 साल के अजीमुल्लाह को भी डोमरी तक खींच लाया। शनिवार को कार्यक्रम देखने के लिए वह एक दिन पहले ही पहुंच गए थे और रात अपने रिश्तेदार के यहां रुके। सुबह होते ही वह एयर शो देखने के लिए गंगा किनारे पहुंच गए।
अजीमुल्लाह ने कहा, “मोदी नहीं होते तो हमार ई इच्छा पूरी नहीं होती।” उम्र बढ़ने के साथ उनकी आंखों की रोशनी कमजोर हो गई है और दूर की चीजें साफ दिखाई नहीं देतीं। इसके बावजूद लड़ाकू विमानों की एक झलक देखने की उनकी चाह कम नहीं हुई। उनके लिए यह सिर्फ एयर शो नहीं, बल्कि लंबे समय से मन में बसी इच्छा पूरी होने जैसा था।
पीएम मोदी के दौरे से पहले मणिकर्णिका घाट की छत पर शवदाह बंद
रविवार को एयर शो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने को देखते हुए वाराणसी में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। सभी प्रमुख घाटों पर शनिवार से ही पुलिसकर्मियों की तैनाती शुरू कर दी गई थी।
सुरक्षा कारणों से मणिकर्णिका घाट की छत पर शनिवार से शवदाह बंद कर दिया गया। रविवार को भी यहां शवदाह नहीं होगा। घाटों पर जाने वाले लोगों की जांच की जा रही थी। स्थानीय लोगों को पहचान पत्र पर पता देखने के बाद ही वाहन ले जाने की अनुमति दी गई। रविवार को भी इसी व्यवस्था के लागू रहने की बात कही गई।
सिंधिया घाट पर इतनी भीड़ कि लोगों का आगे बढ़ना हुआ मुश्किल
मणिकर्णिका घाट से आगे सिंधिया घाट पर भी एयर शो देखने के लिए हजारों लोग जुटे। यहां से राजघाट की ओर आसमान का नजारा साफ दिखाई देता है। यही वजह रही कि घाट की सीढ़ियों से लेकर ऊपर तक लोग खड़े नजर आए।
भीड़ इतनी ज्यादा थी कि लोगों को एक तरफ से दूसरी तरफ जाने में भी परेशानी हुई। आमतौर पर अंतिम संस्कार के बाद लोग यहां स्नान करके घर लौटते हैं, लेकिन शनिवार को घाट पर एयर शो का रोमांच देखने वालों की भीड़ छाई रही।
सतुआ बाबा ने आश्रम की बालकनी से देखा एयर शो
गंगा किनारे उमड़ी भीड़ को देखते हुए सतुआ बाबा नमो घाट नहीं गए। उन्होंने अपने आश्रम की बालकनी से ही आसमान में विमानों की उड़ान का आनंद लिया। वहीं, बटुक आश्रम की छत से भी लोग एयर शो देखते नजर आए।
मणिकर्णिका घाट के आसपास घरों की छतों, खिड़कियों और बालकनियों में भी लोगों की भीड़ दिखाई दी। आम दिनों में चिताओं के धुएं के कारण कई लोग अपनी खिड़कियां बंद रखते हैं, लेकिन एयर शो के दौरान महिलाएं और लड़कियां खिड़कियों से आसमान की ओर देखती नजर आईं। बच्चे भी छतों पर खड़े होकर लड़ाकू विमानों को निहारते रहे।
इंटरस्टेलर के म्यूजिक और एलन वॉकर के गाने ने बढ़ाया एयर शो का रोमांच
नमो घाट पर एयर शो के दौरान लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों के करतबों के साथ संगीत ने भी दर्शकों का उत्साह बढ़ाया। गंगा की लहरों के ऊपर हेलिकॉप्टरों की उड़ान और उनकी सलामी का नजारा लोगों को किसी फिल्मी दृश्य जैसा लगा।
हॉलीवुड फिल्म इंटरस्टेलर के बैकग्राउंड म्यूजिक ने माहौल को और रोमांचक बना दिया। वहीं, एलन वॉकर के गाने ‘हेडलाइट’ की धुन पर हेलिकॉप्टरों की सलामी ने दर्शकों का ध्यान खींचा। देशभक्ति गीतों के साथ बॉलीवुड के गाने भी बजाए गए।
‘मेरी हीर आसमानी’ गीत के दौरान लड़ाकू विमानों की गर्जना ने लोगों का उत्साह बढ़ाया, जबकि दलेर मेहंदी के ‘दंगल-दंगल’ गाने पर माहौल में जोश भर गया। वायुसेना की सारंग टीम ने हवा में हार्ट का आकार बनाकर भी दर्शकों को रोमांचित किया।
मणिकर्णिका घाट पर चिताओं के धुएं के बीच गूंजा वायुसेना का पराक्रम
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर शनिवार को एक अलग ही नजारा देखने को मिला। एक तरफ चिताओं की लपटें थीं और अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देने पहुंचे लोगों की आंखें नम थीं। दूसरी तरफ गंगा के आसमान में राफेल, सुखोई और तेजस जैसे लड़ाकू विमान गर्जना करते हुए उड़ रहे थे।
अंतिम संस्कार में जुटे कई लोगों की नजरें भी कुछ पलों के लिए आसमान की ओर ठहर गईं। गमगीन माहौल के बीच लोगों ने भारतीय वायुसेना के प्रदर्शन को देखा। सदियों से जीवन की अंतिम यात्रा का साक्षी रहा मणिकर्णिका घाट उस दिन आधुनिक भारत की सैन्य शक्ति का भी गवाह बना।
सिंधिया घाट पर इस नजारे को देखने के लिए सबसे ज्यादा भीड़ दिखाई दी। एक ओर काशी की प्राचीन परंपराएं थीं तो दूसरी ओर आसमान में देश की सैन्य ताकत और तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन हो रहा था। इस अनोखे दृश्य ने वाराणसी की ऐतिहासिक पहचान और आधुनिक भारत के सामर्थ्य को एक साथ सामने ला दिया।
बनारसी अंदाज में लोगों ने लिया राफेल की गर्जना का मजा
वाराणसी एयर शो के दौरान विमानों के करतबों के साथ बनारसियों का खास अंदाज भी देखने को मिला। मणिकर्णिका घाट पर मौजूद एक व्यक्ति ने राफेल की तेज आवाज और उसकी उड़ान पर स्थानीय अंदाज में कहा, “बहुत नीचे से जात ह राफेल, सुत्तल अदमी डेरा के उठ जाई।”

