UP Panchayat Election 2026: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। एक तरफ इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है, तो दूसरी तरफ पंचायती राज विभाग ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक के तौर पर छह महीने का अतिरिक्त कार्यकाल देने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इस बीच पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर के एक बयान ने पंचायत चुनाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने साफ कहा है कि जब तक पिछड़े वर्ग का आरक्षण सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक पंचायत चुनाव नहीं होने देंगे।
यूपी पंचायत चुनाव पर ओमप्रकाश राजभर का बड़ा बयान, आरक्षण को लेकर कही ये बात
पंचायत चुनाव को लेकर प्रदेश में पहले से ही असमंजस बना हुआ है। अब ओमप्रकाश राजभर के बयान ने इस मुद्दे को और गर्म कर दिया है। एक जनसभा के दौरान उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग का आरक्षण तय होने तक पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं होगा। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो में राजभर भोजपुरी भाषा में विरोध करने वालों पर निशाना साधते सुनाई दे रहे हैं। वह कह रहे हैं कि कुछ लोगों को पूरी जानकारी नहीं है और वे सोशल मीडिया पर दावा कर रहे हैं कि ओमप्रकाश राजभर को प्रधान नहीं बनने देंगे। उन्होंने ऐसे लोगों को नसीहत देते हुए कहा कि पहले अपने नेताओं को संभालें, फिर दूसरों पर टिप्पणी करें।
राजभर ने आगे कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव का बिगुल बजेगा। उन्होंने पिछड़ा वर्ग आयोग की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि आयोग हाई कोर्ट में अपनी बात रखेगा। आयोग की ओर से बताया जा सकता है कि 50 जिलों में काम पूरा हो चुका है, जबकि 25 जिलों का काम अभी बाकी है। इसके लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय भी मांगा जा सकता है।
पिछड़ों के आरक्षण के बिना पंचायत चुनाव नहीं कराने की बात
ओमप्रकाश राजभर ने अपने बयान में यह भी कहा कि अगर पिछड़ा वर्ग आयोग को रिपोर्ट तैयार करने के लिए समय चाहिए तो चुनाव कराना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि वह खुद भी चाहकर अभी पंचायत चुनाव नहीं करा पाएंगे। उनके इस बयान को पंचायत चुनाव टलने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
वीडियो में राजभर यह कहते भी सुनाई दे रहे हैं कि उनके पास पावर है और वह उसका इस्तेमाल कर रहे हैं। जिसे जो करना है, वह कर सकता है। इस दौरान उन्होंने अपने विरोधियों के लिए कुछ अमर्यादित शब्दों का भी इस्तेमाल किया। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
ग्राम प्रधानों का प्रशासक के तौर पर बढ़ सकता है कार्यकाल
इस बीच पंचायत चुनाव से जुड़ा एक और बड़ा अपडेट सामने आया है। पंचायती राज विभाग ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक के तौर पर अगले छह महीने तक जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। मौजूदा व्यवस्था के तहत प्रशासकों का छह महीने का कार्यकाल 24 नवंबर को समाप्त हो रहा है।
पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बताया कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने से जुड़ी फाइल पर हस्ताक्षर करके मुख्यमंत्री के पास भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानों को छह महीने और प्रशासक के तौर पर काम करने का मौका मिल सकता है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला शासन की मंजूरी के बाद ही होगा।
राजभर ने इस मामले पर चुटकी लेते हुए कहा कि प्रधान जी लोग अपने पद का आनंद लें। उनके इस बयान के बाद पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
हाई कोर्ट के आदेश और सरकार की तैयारी में क्यों फंसा पंचायत चुनाव?
गौरतलब है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव तीन महीने के भीतर कराने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने पिछड़ा वर्ग आयोग को भी एक महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा था।
अब एक तरफ हाई कोर्ट का चुनाव कराने का आदेश है, तो दूसरी तरफ पिछड़ा वर्ग आरक्षण की प्रक्रिया और प्रशासकों का कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव सामने है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यूपी में पंचायत चुनाव तय समय पर होंगे या फिर विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जाएंगे?
फिलहाल सरकार की ओर से चुनाव की तारीखों को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है। ओमप्रकाश राजभर के बयान ने साफ कर दिया है कि पिछड़ा वर्ग आरक्षण का मुद्दा पंचायत चुनाव की राह में अहम भूमिका निभाने वाला है। अब सबकी नजर सरकार के अगले फैसले और पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट पर टिकी है।

