कनाडा ने हाल ही में अपने वीज़ा और इमिग्रेशन नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य फर्जी या संदिग्ध आवेदनों पर नियंत्रण रखना बताया गया है, लेकिन इनका सबसे ज़्यादा असर भारतीय छात्रों और कामगारों पर पड़ता दिख रहा है। संसद में पेश नए विधेयक के तहत कनाडा की इमिग्रेशन अथॉरिटी को अब यह अधिकार मिलेगा कि वे किसी भी अस्थायी वीज़ा आवेदन को बिना लंबी प्रक्रिया के रद्द कर सकें या जारी करने से इनकार कर सकें।
क्या हैं नए नियमों के तहत बदलाव?
कनाडा सरकार ने “Immigration and Refugee Protection Regulations” में संशोधन किया है, जिसके तहत अस्थायी निवासी वीज़ा (Temporary Resident Visa – TRV), स्टडी परमिट, वर्क परमिट, या टूरिस्ट वीज़ा को कई कारणों से रद्द किया जा सकेगा।
इन कारणों में शामिल हैं
गलत या भ्रामक जानकारी देना: यदि किसी आवेदक ने आवेदन में झूठी जानकारी दी या दस्तावेज़ फर्जी पाए गए, तो वीज़ा तुरंत रद्द किया जा सकेगा।
आपराधिक पृष्ठभूमि: किसी भी प्रकार के आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति का आवेदन सीधे अस्वीकृत किया जा सकता है।
देश छोड़ने की संभावना न होना: यदि अधिकारी को यह लगता है कि आवेदक वीज़ा अवधि समाप्त होने के बाद कनाडा नहीं छोड़ेगा, तो उसे वीज़ा नहीं मिलेगा।
प्रशासनिक त्रुटि या दस्तावेज़ की समस्या: दस्तावेज़ के खो जाने, चोरी, नष्ट होने या प्रशासनिक गलती से जारी होने की स्थिति में वीज़ा स्वतः निरस्त किया जा सकेगा।
स्थायी निवासी बनने की स्थिति: यदि कोई व्यक्ति अस्थायी से स्थायी निवासी बन जाता है, तो उसका पुराना वीज़ा रद्द किया जा सकता है।
भारतीय छात्रों और कामगारों पर प्रभाव
भारत कनाडा को सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्र भेजने वाला देश है — लगभग 4.27 लाख भारतीय विद्यार्थी वहाँ पढ़ाई कर रहे हैं। कनाडा के इन नए नियमों के चलते बड़ी संख्या में छात्रों और अस्थायी कामगारों पर असर पड़ने की संभावना है।
नवंबर 2024 में Student Direct Stream (SDS) प्रोग्राम को बंद किए जाने के बाद से ही भारतीय छात्रों के वीज़ा प्रोसेस में देरी और अस्वीकृति दर में वृद्धि हुई है। पहले यह प्रोग्राम भारतीय छात्रों को तेज़ी से वीज़ा दिलाने में मदद करता था, लेकिन अब इस सुविधा के खत्म होने से प्रक्रिया लंबी और जटिल हो गई है।
इसके अलावा, कनाडा सरकार ने “डमी वीज़ा एक्सटेंशन” यानी नकली वीज़ा बढ़ाने के प्रयासों पर भी रोक लगाई है। इससे उन छात्रों और कामगारों को परेशानी हो रही है जो अस्थायी रूप से अपने प्रवास को बढ़ाना चाहते हैं।
क्यों माना जा रहा है भारत को निशाना?
कनाडा के इन कदमों को कई विशेषज्ञ भारत-विरोधी नीति के रूप में देख रहे हैं। दरअसल, भारत से आने वाले वीज़ा आवेदनों में हाल के वर्षों में तेज़ी से वृद्धि हुई है और इसी के साथ फर्जी दस्तावेज़ों और झूठी जानकारी के मामले भी बढ़े हैं। कनाडा ने अमेरिकी एजेंसियों के साथ मिलकर इन फर्जी आवेदनों की पहचान करने के लिए साझेदारी की है, जिससे भारतीय आवेदकों की जांच और भी कड़ी हो गई है।

