You are currently viewing नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने पर सरकार का जोर

नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने पर सरकार का जोर

भारत आने वाले वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। सरकार अब सौर पैनल (Solar Panels), पवन टरबाइन (Wind Turbines) और अन्य हरित ऊर्जा उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नई नीतिगत सुधारों पर काम कर रही है। इसका लक्ष्य न केवल आयात पर निर्भरता घटाना है, बल्कि आने वाले दशक में इस क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाना भी है।

2030 तक वैश्विक बाजार में 10% हिस्सेदारी का लक्ष्य

भारत सरकार का उद्देश्य है कि वर्ष 2030 तक वैश्विक पवन ऊर्जा बाजार (Global Wind Energy Market) में देश की हिस्सेदारी 10% तक पहुंच जाए। इसके लिए नीति आयोग, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) तथा उद्योग जगत मिलकर एक दीर्घकालिक रणनीति तैयार कर रहे हैं।
इस योजना के तहत देश में बड़े पैमाने पर विनिर्माण इकाइयों की स्थापना, कर प्रोत्साहन (Tax Incentives), और निर्यात को बढ़ावा देने वाली नीतियाँ लागू की जाएंगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के पास इस क्षेत्र में विशाल क्षमता मौजूद है—देश के कई तटीय और रेगिस्तानी क्षेत्रों में सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन की बड़ी संभावनाएँ हैं। यदि उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर निर्यात-उन्मुख नीति अपनाई जाती है, तो भारत न केवल घरेलू मांग पूरी कर सकेगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

चीन के प्रभुत्व को चुनौती देने की तैयारी

वर्तमान में सौर पैनल और पवन टरबाइन बाजार पर चीन का दबदबा बना हुआ है। विश्व के लगभग 70% सौर उपकरण चीन में बनते हैं। भारत अब इस निर्भरता को कम करने के लिए वैकल्पिक उत्पादन केंद्र के रूप में खुद को स्थापित करना चाहता है।
सरकार की नई औद्योगिक नीति के तहत “मेक इन इंडिया फॉर वर्ल्ड” पहल को इस क्षेत्र में और सशक्त बनाया जाएगा।

इसके तहत घरेलू कंपनियों के साथ-साथ विदेशी निवेशकों को भी भारत में उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करने के लिए आकर्षित किया जाएगा। इसके लिए भूमि, बिजली और कर से जुड़ी रियायतें देने की योजना है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

भारत पहले ही 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य तय कर चुका है। इस दिशा में यह कदम आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat) मिशन का हिस्सा है।
सरकार का मानना है कि घरेलू विनिर्माण बढ़ने से न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि हरित प्रौद्योगिकी (Green Technology) के क्षेत्र में भारत की स्थिति भी मजबूत होगी।

वर्तमान में भारत कई नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों जैसे सोलर सेल, मॉड्यूल और इनवर्टर के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर है। लेकिन नई नीति लागू होने के बाद यह निर्भरता धीरे-धीरे समाप्त हो सकती है।

Spread the love

Leave a Reply