बिहार में मिली ऐतिहासिक जीत और सफलतापूर्वक सरकार गठन के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपना ध्यान अब पश्चिम बंगाल पर केंद्रित कर दिया है। आगामी मार्च–अप्रैल में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी ने अपने “ऑपरेशन पश्चिम बंगाल” की शुरुआत पाँच महीने पहले ही कर दी है। इस मिशन के तहत भाजपा ने बिहार और महाराष्ट्र में अपनाई गई प्रभावी चुनावी रणनीतियों को आधार बनाते हुए बंगाल में संगठन और चुनाव तैयारी को अभूतपूर्व स्तर पर सक्रिय कर दिया है।
अमित शाह ने सौंपी जिम्मेदारियाँ
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए व्यापक और सुनियोजित कदम उठाए हैं। उन्होंने न केवल प्रदेश संगठन को नए सिरे से ऊर्जा देने के लिए योजना तैयार की है, बल्कि संगठनात्मक स्तर पर प्रमुख जिम्मेदारियाँ भी बांटी हैं। इस अभियान के अंतर्गत छह संगठन सचिवों और छह वरिष्ठ नेताओं को राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किया गया है, जिनका मुख्य उद्देश्य पार्टी के कैडर को सक्रिय करना, बूथ प्रबंधन को मजबूत करना और मतदाताओं तक भाजपा की नीतियों व दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से पहुँचाना है।
पार्टी ने बूथ स्तर पर संगठन निर्माण
अमित शाह के नेतृत्व में तैयार की गई इस रणनीति का मूल फोकस उन क्षेत्रों पर है जहाँ भाजपा अब तक अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। इसका उद्देश्य संगठनात्मक कमियों को दूर करना और एक मजबूत चुनावी नेटवर्क खड़ा करना है। बिहार और महाराष्ट्र के चुनाव अभियानों में पार्टी ने बूथ स्तर पर संगठन निर्माण, जातिगत और सामाजिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण, और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से अपने पक्ष में माहौल बनाया था। पश्चिम बंगाल में भी ठीक वही मॉडल अपनाने की तैयारी है।
विकास एजेंडा प्रभावी ढंग से स्थापित हो सके
भाजपा की योजना है कि वरिष्ठ नेताओं और संगठन सचिवों को जिले और मंडल स्तर पर तैनात कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बनाई जाए। ये नेता न केवल पार्टी के अंदरूनी ढांचे को मजबूत करेंगे, बल्कि विपक्षी पार्टियों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी जनसंपर्क अभियान चलाएंगे। इसके साथ ही बंगाल के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक माहौल को ध्यान में रखते हुए विशेष कार्यक्रमों और संवाद अभियानों की शुरुआत की जाएगी, ताकि जनता के बीच भाजपा की विचारधारा और विकास एजेंडा प्रभावी ढंग से स्थापित हो सके।
चुनावी रणनीतियों की समझ
इस पूरी प्रक्रिया में अमित शाह की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संगठनात्मक मामलों में उनकी पकड़, चुनावी रणनीतियों की समझ और राजनीतिक समीकरणों को साधने की क्षमता भाजपा के लिए हमेशा से सहायक रही है। बिहार मॉडल ने यह साबित किया कि सही रणनीति और जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ से कठिन चुनावों को भी सहज बनाया जा सकता है। इसी अनुभव के साथ शाह ने पश्चिम बंगाल में भी पार्टी के लिए एक नई दिशा तय की है।
कुल मिलाकर, भाजपा का “ऑपरेशन पश्चिम बंगाल” पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक अभियान है, जिसमें संगठन को मजबूत करने, जनसंपर्क बढ़ाने और चुनाव जीतने की व्यापक रणनीति तैयार की गई है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, इस मिशन का प्रभाव और स्पष्ट दिखाई देगा।

