Bihar Politics: बिहार की राजनीति के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसने सियासी समीकरणों को पूरी तरह गरमा दिया है। मोकामा के कद्दावर विधायक और ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह ने चुनावी राजनीति से संन्यास लेने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान कार्यकाल विधायक के रूप में उनका अंतिम सफर है।
नीतीश कुमार के प्रति निष्ठा
अनंत सिंह ने अपने इस चौंकाने वाले फैसले के पीछे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अपनी अटूट वफादारी को मुख्य कारण बताया है। बाहुबली नेता ने भावुक होते हुए कहा कि उनकी राजनीति नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द ही रही है। उन्होंने पहले ही यह संकल्प लिया था कि यदि मुख्यमंत्री सक्रिय राजनीति से दूरी बनाएंगे, तो वे भी मैदान छोड़ देंगे। अब जबकि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं, अनंत सिंह ने भी अपने कदम पीछे खींचने का मन बना लिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “नीतीश जी की अनुपस्थिति में चुनाव लड़ने का मेरा कोई इरादा नहीं है।”
मोकामा का नया उत्तराधिकारी
अनंत सिंह के इस फैसले के साथ ही मोकामा के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी तस्वीर साफ हो गई है। अगले विधानसभा चुनाव में उत्तराधिकार की कमान अब उनके बेटे के हाथों में होगी। अनंत सिंह ने घोषणा की है कि वे खुद मैदान में उतरने के बजाय अपने बेटे (बाल-बुतुरु) को चुनावी अखाड़े में उतारेंगे। मोकामा, जिसे अनंत सिंह का अभेद्य किला माना जाता है, वहां अब उनके पुत्र ‘छोटे सरकार’ की विरासत को आगे बढ़ाएंगे।
समर्थकों में हलचल
अनंत सिंह के इस राजनीतिक संन्यास और उत्तराधिकार के ऐलान ने उनके समर्थकों के बीच खलबली मचा दी है। दशकों से मोकामा की राजनीति को अपनी शर्तों पर चलाने वाले अनंत सिंह का यह फैसला क्षेत्र की भावी चुनावी रणनीति को पूरी तरह बदल देगा। स्थानीय जनता और समर्थकों के लिए यह एक युग के अंत जैसा है, लेकिन साथ ही वे अपने नेता के बेटे के रूप में नए नेतृत्व को देखने के लिए भी उत्सुक हैं।

