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Ram Mandir Trust Meeting: रामनवमी पर होगा दिव्य ‘सूर्य तिलक’, ऐतिहासिक आयोजनों पर छपेगी विशेष पुस्तिका

Ram Mandir Trust Meeting: चैत्र नवरात्र और रामनवमी के पावन अवसर से ठीक पहले शनिवार (21 मार्च, 2026) को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण त्रैमासिक बैठक संपन्न हुई। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के आवास पर आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में मंदिर निर्माण की प्रगति, आगामी धार्मिक अनुष्ठानों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गहन मंथन किया गया। बैठक के उपरांत महासचिव चंपत राय ने मीडिया को संबोधित करते हुए कई ऐतिहासिक घोषणाएं कीं, जो राम भक्तों के लिए उत्साहजनक हैं।

श्री राम यंत्र स्थापना और भव्य अनुष्ठानों की समीक्षा

ट्रस्ट की बैठक में सबसे पहले 19 मार्च को वर्ष प्रतिप्रतिपदा के शुभ अवसर पर आयोजित ‘श्री राम यंत्र स्थापना’ (Shree Ram Yantra Installation) कार्यक्रम की सफलता पर चर्चा की गई। महासचिव चंपत राय ने बताया कि 5 अगस्त 2020 के भूमि पूजन और 22 जनवरी 2024 की प्राण प्रतिष्ठा के बाद, ध्वजारोहण और यंत्र स्थापना जैसे कार्यक्रम मंदिर के आध्यात्मिक पूर्णता की ओर बढ़ते कदम हैं। इन आयोजनों में हजारों की संख्या में साधु-संतों, विशिष्ट अतिथियों और दिन-रात सेवा करने वाले श्रमिकों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई है, जो मंदिर के इतिहास का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।

ऐतिहासिक दस्तावेजों का संरक्षण और प्रकाशन

ट्रस्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मंदिर से जुड़े सभी ऐतिहासिक मील के पत्थरों (Historical Milestones) को एक दस्तावेज का रूप देने का फैसला किया है। भूमि पूजन से लेकर रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, ध्वजारोहण और राम यंत्र स्थापना तक के विवरणों को एक भव्य ‘स्मरण पुस्तिका’ के रूप में प्रकाशित किया जाएगा। इस किताब में दुर्लभ तस्वीरों और आयोजनों के सूक्ष्म विवरण शामिल होंगे। साथ ही, ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण में पसीना बहाने वाले श्रमिकों और कार्यदायी संस्थाओं (Temple Construction Workers) को विशेष रूप से सम्मानित करने की योजना बनाई है, ताकि उनके योगदान को सदैव याद रखा जाए।

रामनवमी पर अद्भुत खगोलीय और तकनीकी संगम

इस वर्ष की रामनवमी (27 मार्च) अयोध्या के लिए विज्ञान और आध्यात्म के अद्भुत मिलन की गवाह बनेगी। दोपहर 12 बजे अत्याधुनिक ऑप्टो-मैकेनिकल तकनीक के माध्यम से सूर्य की किरणें सीधे प्रभु रामलला के मस्तक (Surya Tilak on Ram Lalla) पर तिलक करेंगी। विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए यंत्रों का सफल परीक्षण कर लिया गया है। चंपत राय ने जानकारी दी कि यह तकनीक इस तरह डिजाइन की गई है कि अगले 19 वर्षों तक प्रत्येक रामनवमी पर ठीक इसी समय सूर्य की रश्मियाँ रामलला का अभिषेक करेंगी। इसके अतिरिक्त, 22 से 25 मार्च तक मंदिर के विभिन्न शिखरों पर भव्य ध्वजारोहण कार्यक्रम (Flag Hoisting Ceremony) आयोजित किए जाएंगे।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और दर्शन प्रबंधन पर मंथन

मंदिर लोकार्पण के बाद से अब तक करीब 7 करोड़ श्रद्धालु (Ram Temple Devotees Count) रामलला के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए ट्रस्ट ने सुरक्षा और दर्शन की सुगमता को लेकर विस्तृत चर्चा की। हालांकि परकोटे और कुबेर टीला स्थित मंदिरों के दर्शन के लिए भक्तों को अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा, लेकिन मंदिर के चार मुख्य द्वारों में से तीन का निर्माण पूर्ण हो चुका है। जल्द ही इन लोकार्पित द्वारों (New Temple Entrance Gates) को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। सुरक्षा मानकों को और अधिक अत्याधुनिक बनाने पर भी सर्वसम्मति बनी है।

भविष्य की रूपरेखा और अगली बैठक की तिथि

बैठक के अंत में आगामी आयोजनों की रूपरेखा तय की गई, जिसमें 2 अप्रैल को होने वाला विशेष ध्वजारोहण और हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti Celebrations) पर परिसर स्थित हनुमान मंदिर में होने वाले उत्सव प्रमुख हैं। ट्रस्ट की अगली समीक्षा बैठक 11 जुलाई 2026 को प्रस्तावित है, जिसमें निर्माण कार्य के अंतिम चरणों और आगामी वार्षिक योजनाओं पर विचार किया जाएगा। फिलहाल, पूरी अयोध्या नगरी रामनवमी के उस दिव्य क्षण की प्रतीक्षा कर रही है जब विज्ञान के सहयोग से प्रकृति स्वयं रामलला का वंदन करेगी।

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