Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंग चुका है। राज्य में पहले चरण के मतदान से पहले राजनीतिक हलचल अपने चरम पर है। जहां एक ओर सभी प्रमुख दलों के नेता मतदाताओं को लुभाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह पर वायरल वीडियो मामले में एफआईआर दर्ज होने से सियासी तापमान और बढ़ गया है।
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह पर कार्रवाई
बिहार की राजनीति में हड़कंप उस समय मच गया जब केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह के खिलाफ एक वायरल वीडियो मामले में एफआईआर दर्ज की गई। चुनाव आयोग के निर्देश पर पुलिस ने जांच शुरू की थी, जिसके बाद वीडियो की सत्यता की जांच कर कार्रवाई की गई है। यह वीडियो कथित रूप से आचार संहिता उल्लंघन से जुड़ा बताया जा रहा है।
ललन सिंह के खिलाफ दर्ज यह मामला चुनाव प्रचार के आखिरी दिन बड़ी चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए नीतीश कुमार सरकार पर निशाना साधा है, जबकि जेडीयू ने इसे “राजनीतिक साजिश” बताया है।
पहले चरण का प्रचार आज थम जाएगा
बिहार चुनाव के पहले चरण के लिए चुनावी प्रचार का शोर आज शाम थम जाएगा। इसके बाद प्रत्याशी केवल डोर-टू-डोर अभियान या सीमित संपर्क माध्यमों से ही मतदाताओं तक पहुंच सकेंगे।
पहले चरण में कुल xx जिलों की xx विधानसभा सीटों पर मतदान होना है (संख्या चुनाव आयोग द्वारा घोषित)। इस चरण में कई दिग्गज नेताओं की किस्मत दांव पर लगी है।
राज्य में तेज़ हुआ चुनावी संग्राम
आज सभी प्रमुख दलों — राजग (NDA) और महागठबंधन (RJD-कांग्रेस-लेफ्ट) — ने अपनी-अपनी अंतिम जनसभाएं निर्धारित की हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव, राहुल गांधी और अन्य बड़े नेताओं की सभाओं को लेकर राज्यभर में कार्यकर्ताओं में जोश देखा जा रहा है।
हर पार्टी अपने मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंच रही है एनडीए सरकार की विकास योजनाओं, रोजगार और कानून व्यवस्था को प्रमुख मुद्दा बना रहा है।वहीं महागठबंधन बेरोजगारी, महंगाई और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है।
मतदाताओं को लुभाने की अंतिम कोशिशें
प्रत्याशी आज अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। गांवों, कस्बों और शहरों में नुक्कड़ सभाओं का सिलसिला जारी है। सोशल मीडिया पर भी प्रचार अभियान अपने चरम पर है। युवा मतदाताओं तक पहुंचने के लिए उम्मीदवार डिजिटल प्रचार का सहारा ले रहे हैं।
जनता में इस बार माहौल काफी रोचक है — युवा वर्ग रोजगार और शिक्षा को लेकर सजग है, जबकि ग्रामीण मतदाता विकास और मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
चुनाव आयोग की सख्ती
चुनाव आयोग ने सभी जिलों में प्रशासन को अलर्ट पर रखा है। सोशल मीडिया पर फैलने वाले भ्रामक संदेशों, फर्जी वीडियो और गलत सूचनाओं पर नजर रखी जा रही है। आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे किसी भी तरह के दबाव या लालच में न आएं और लोकतंत्र के पर्व में बढ़-चढ़कर भाग लें।

