Budget Session: संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज भारी शोर-शराबे और तल्खी की भेंट चढ़ गया। विपक्षी दलों द्वारा विभिन्न मुद्दों पर किए गए विरोध प्रदर्शन और सदन की कार्यवाही में बाधा डालने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
सदन के भीतर अनुशासनहीनता पर सवाल
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेताओं के व्यवहार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सदस्य न केवल सदन की कार्यवाही में व्यवधान डाल रहे हैं, बल्कि संसद परिसर के भीतर खाने-पीने की वस्तुएं लाकर अनुशासनहीनता का प्रदर्शन भी कर रहे हैं। रिजिजू ने कहा कि इस तरह के ‘नाटकीय कृत्यों’ से जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
जनहित के मुद्दों पर नारेबाजी से कार्यवाही स्थगित
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही रसोई गैस (LPG) की कीमतों में वृद्धि और अन्य ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया। विपक्षी सदस्यों के भारी शोर-शराबे और नारेबाजी के कारण सदन में कामकाज करना असंभव हो गया। स्थिति को देखते हुए पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने सदस्यों से सदन को सुचारू रूप से चलने देने का आग्रह किया, लेकिन हंगामा न थमते देख कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
कांग्रेस सदस्यों के व्यवहार पर सत्ता पक्ष का प्रहार
संसदीय कार्य मंत्री ने विशेष रूप से कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके सदस्यों का आचरण दिन-ब-दिन बिगड़ता जा रहा है। जब पीठासीन अधिकारी ने वर्ष 2025-2026 के लिए अनुदान की पूरक मांगों पर चर्चा शुरू करने का प्रयास किया, तो विपक्षी सांसद सदन के बीचों-बीच (वेल) आकर नारेबाजी करने लगे। सरकार का मानना है कि यह व्यवहार न केवल संसदीय परंपराओं के खिलाफ है, बल्कि पूरे देश के सामने लोकतंत्र की छवि को धूमिल कर रहा है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की कड़ी फटकार
इससे पहले, सुबह सदन की शुरुआत में ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल चलाने की कोशिश की, जिसे लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। उन्होंने सांसदों को समझाते हुए कहा कि प्रश्नकाल राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समस्याओं को उठाने का मंच है, लेकिन सुनियोजित तरीके से इसमें बाधा डालना संसदीय मर्यादा का उल्लंघन है। स्पीकर ने स्पष्ट किया कि चाहे संसद के भीतर हो या बाहर, सांसदों का आचरण गरिमापूर्ण होना चाहिए।
सदन की गरिमा को बनाए रखने की चुनौती
पीठासीन अधिकारी और स्पीकर दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि सदन की गरिमा सर्वोपरि है। ओम बिरला ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जानबूझकर सदन की कार्यवाही रोकना और नियमों की अवहेलना करना संसदीय लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। उन्होंने विपक्षी सांसदों को चेताया कि उनका व्यवहार देश की जनता देख रही है और इस तरह के कृत्यों से सदन की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचती है।

