You are currently viewing Chaitra Navratri 2026: कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और विधि; जानें मां महागौरी को प्रसन्न करने के अचूक नियम

Chaitra Navratri 2026: कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और विधि; जानें मां महागौरी को प्रसन्न करने के अचूक नियम

Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक ‘चैत्र नवरात्रि’ का उल्लास अपने चरम पर है। शक्ति उपासना के इन नौ दिनों में महाष्टमी तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है। साल 2026 में दुर्गा अष्टमी का पर्व 26 मार्च को मनाया जाएगा। यह दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप, मां महागौरी को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अष्टमी के दिन विधि-विधान से पूजा और कन्या पूजन करने से भक्तों के जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।

अष्टमी या नवमी: कन्या भोज और पूजन के लिए श्रेष्ठ तिथि का चयन

श्रद्धालुओं के बीच अक्सर यह संशय रहता है कि कन्या भोज (Kanya Bhoj) अष्टमी को करना चाहिए या नवमी को। शास्त्रों के मत अनुसार, दोनों ही तिथियां इस पवित्र कार्य के लिए अत्यंत फलदायी हैं। जो भक्त अष्टमी का व्रत रखते हैं, वे इसी दिन पूजन संपन्न करते हैं। वहीं, कई परिवारों में कुल परंपरा के अनुसार नवमी तिथि पर व्रत पारण और ‘कंचक’ खिलाना श्रेष्ठ माना जाता है। आप अपनी पारिवारिक मान्यताओं और सुविधा के अनुसार इन दोनों में से किसी भी दिन शक्ति स्वरूपा कन्याओं का पूजन कर सकते हैं।

महाष्टमी 2026 पर कन्या पूजन के सटीक शुभ मुहूर्त और समय

पंचांग गणना के अनुसार, 26 मार्च को कन्या पूजन के लिए तीन विशेष समय (Auspicious Timings) निर्धारित हैं। इन मुहूर्तों में पूजा करने से साधक को अनंत गुना फल प्राप्त होता है:

  • ब्रह्म मुहूर्त व सुबह का समय: प्रातः 06:16 बजे से सुबह 07:48 बजे तक।
  • दोपहर का लाभ चौघड़िया: सुबह 10:56 बजे से दोपहर 02:01 बजे तक।
  • अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): दोपहर 12:02 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक।

शास्त्रोक्त नियम: कन्याओं की आयु और संख्या का विशेष महत्व

सफल पूजन के लिए शास्त्रों में कुछ अनिवार्य पूजा नियम (Ritual Guidelines) बताए गए हैं। कन्या पूजन के लिए 2 से 10 वर्ष तक की आयु की बालिकाओं को आमंत्रित करना सबसे उत्तम है। संख्या की बात करें तो 9 कन्याओं का पूजन अनिवार्य माना गया है, जो नवदुर्गा का प्रतीक हैं। यदि 9 कन्याएं उपलब्ध न हों, तो श्रद्धापूर्वक 2, 5 या 7 कन्याओं का पूजन भी किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, एक छोटे बालक को बटुक भैरव या लांगुरा के रूप में आमंत्रित करना न भूलें, क्योंकि उनके बिना देवी की आराधना अधूरी मानी जाती है।

संपूर्ण कन्या पूजन विधि: कदम-दर-कदम सेवा और सत्कार

महाष्टमी के दिन पूजन की सही पद्धति (Step-by-Step Rituals) अपनाना आवश्यक है। कन्याओं के घर आगमन पर सबसे पहले उनके चरण पखारें और उन्हें स्वच्छ आसन पर बैठाएं। इसके बाद सभी के माथे पर कुमकुम-अक्षत का तिलक लगाकर कलावा बांधें। मां के भोग स्वरूप तैयार किए गए सात्विक भोजन (पूरी, काले चने और हलवा) को अत्यंत प्रेम और आदर के साथ परोसें। भोजन के पश्चात कन्याओं को अपनी सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा, फल या उपहार भेंट करें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करें।

Spread the love

Leave a Reply