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दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्थायी संकट, लेकिन हवा की हालत जस की तस

Delhi pollution crisis: साल 2025 की शुरुआत के साथ ही दिल्ली-NCR एक बार फिर गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में नजर आया। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र लगातार भारत के सबसे प्रदूषित इलाकों में शामिल रहा है। यहां हालात ऐसे बन चुके हैं कि साल तो बदल जाते हैं, लेकिन प्रदूषण का स्तर जस का तस बना रहता है। पहले जहां प्रदूषण को सर्दियों की समस्या माना जाता था, अब यह पूरे साल लोगों की सेहत और जीवनशैली को प्रभावित कर रहा है। साफ हवा यहां अब अपवाद बनती जा रही है, जबकि जहरीली हवा रोजमर्रा की सच्चाई बन चुकी है।

दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्थायी संकट

दिल्ली-NCR में प्रदूषण केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह एक सामाजिक, स्वास्थ्य और राजनीतिक समस्या का रूप ले चुका है। इस पर चर्चा सड़कों से लेकर संसद तक होती रही है, लेकिन जमीनी हालात में अपेक्षित सुधार अब तक नजर नहीं आया। नए साल के आगमन के बावजूद लोगों को राहत नहीं मिली है और सांस लेने की दिक्कत, आंखों में जलन, खांसी और गंभीर बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है।
प्रदूषण के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या, निर्माण कार्यों से उड़ती धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, कचरे का जलना और हरियाणा-पंजाब में पराली जलाने जैसी समस्याएं दिल्ली की हवा को जहरीला बनाती हैं। इसके अलावा भौगोलिक स्थिति और मौसम भी हालात को और बिगाड़ देते हैं। सर्दियों में हवा की रफ्तार कम होने से प्रदूषक तत्व वातावरण में ही फंसे रह जाते हैं, जिससे स्मॉग की स्थिति बनती है।

वाहनों पर पाबंदी

हालांकि यह मान लेना गलत होगा कि इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। बीते वर्षों में कुछ कदम जरूर उठाए गए हैं, जैसे ग्रैप (GRAP) लागू करना, निर्माण कार्यों पर अस्थायी रोक, वाहनों पर पाबंदी और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना। लेकिन ये उपाय अक्सर अस्थायी साबित होते हैं और स्थायी समाधान की कमी साफ नजर आती है।
आने वाले समय में प्रदूषण से निपटने के लिए दीर्घकालिक और ठोस रणनीति की जरूरत है। सार्वजनिक परिवहन को और सुलभ व स्वच्छ बनाना, इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाना, निर्माण स्थलों पर सख्त नियम लागू करना और उद्योगों में स्वच्छ तकनीक का उपयोग जरूरी है। साथ ही पराली जलाने के विकल्प किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने होंगे, ताकि समस्या की जड़ पर काम किया जा सके।

नागरिक खुद जागरूक नहीं होंगे

इसके अलावा आम लोगों की भागीदारी भी बेहद अहम है। जब तक नागरिक खुद जागरूक नहीं होंगे और प्रदूषण फैलाने वाली आदतों में बदलाव नहीं करेंगे, तब तक हालात में सुधार मुश्किल है। पेड़ लगाना, निजी वाहन कम इस्तेमाल करना और नियमों का पालन करना छोटे लेकिन असरदार कदम हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, दिल्ली-NCR का प्रदूषण कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन इसका लगातार गंभीर होते जाना चिंता का विषय है। नए साल में बीते अनुभवों से सबक लेकर अगर सरकार, प्रशासन और जनता मिलकर ईमानदारी से प्रयास करें, तो आने वाले वर्षों में राजधानी की हवा को सांस लेने लायक बनाना असंभव नहीं है।

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