Eid Ul Fitr Moon Sighting Date: रमजान का पवित्र महीना अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय के लोग पूरे उत्साह के साथ अल्लाह की इबादत कर रहे हैं और रोजे रख रहे हैं। रमजान के समापन के साथ ही ‘शव्वाल’ के महीने की शुरुआत होती है, जिसके पहले दिन ईद-उल-फितर यानी मीठी ईद का त्योहार मनाया जाता है। चूँकि इस्लामिक कैलेंडर चंद्रमा की स्थिति पर आधारित है, इसलिए ईद की सटीक तारीख का निर्धारण पूरी तरह से चांद के दीदार पर निर्भर करता है।
कब खत्म होगा रमजान?
अरब देशों में ईद की तारीख को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल सेंटर और भौगोलिक गणनाओं के अनुसार, सऊदी अरब, यूएई और ईरान में चांद दिखने की संभावनाओं का आकलन किया गया है। अनुमान है कि सऊदी अरब में शव्वाल का चांद 18 मार्च को नजर आ सकता है।
यदि 18 मार्च की शाम को चांद दिखता है, तो वहां 19 मार्च को ईद मनाई जाएगी। इस स्थिति में, इस वर्ष वहां 29 रोजे पूरे होंगे। हालांकि, यदि किसी कारणवश 18 तारीख को चांद नजर नहीं आता है, तो 30 रोजे पूरे होने के बाद 20 मार्च को वहां ईद का जश्न मनाया जाएगा। खाड़ी देशों में चांद दिखने की सूचना मिलते ही भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों में भी सुगबुगाहट तेज हो जाती है।
भारत में कब मनाई जाएगी मीठी ईद?
भारत में त्योहारों की तारीख अक्सर भौगोलिक स्थिति के कारण खाड़ी देशों से एक दिन पीछे रहती है। भारत में ईद-उल-फितर का पर्व पारंपरिक रूप से सऊदी अरब के एक दिन बाद मनाया जाता है। खगोलीय अनुमानों की मानें तो यदि सऊदी अरब में 18 मार्च को चांद नजर आता है, तो भारत के आसमान में 19 मार्च को शव्वाल का चांद दिखने की प्रबल संभावना है।
इस गणना के आधार पर, भारत में 20 मार्च को ईद मनाई जा सकती है। लेकिन, यदि मौसम या अन्य कारणों से चांद दिखने में देरी होती है, तो यह पर्व 21 मार्च तक भी जा सकता है। ईद की अंतिम और आधिकारिक तारीख का ऐलान स्थानीय हिलाल कमेटियों द्वारा चांद देखने के बाद ही किया जाएगा।
ईद-उल-फितर का महत्व
ईद-उल-फितर केवल पकवानों और उत्सव का दिन नहीं है, बल्कि यह रमजान के दौरान रखे गए धैर्य और संयम का पुरस्कार है। इसे ‘मीठी ईद’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन घरों में विशेष रूप से शिर-खुरमा और सेवइयां बनाई जाती हैं। लोग सुबह ईदगाहों और मस्जिदों में नमाज अदा करते हैं और एक-दूसरे को गले लगकर बधाई देते हैं। यह दिन आपसी भेदभाव भुलाकर भाईचारे और शांति का संदेश देने का प्रतीक माना जाता है।
नोट: ईद की तारीख पूरी तरह से चंद्रमा के प्रत्यक्ष दर्शन पर आधारित होती है, इसलिए सटीक जानकारी के लिए स्थानीय हिलाल कमेटी के आधिकारिक बयान का इंतजार करें।

