Iran US Ceasefire Controversy:: ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए कथित युद्धविराम समझौते (Ceasefire Agreement) को लेकर एक नया अंतरराष्ट्रीय विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा किए गए मध्यस्थता के दावों पर अब वॉशिंगटन और तेहरान, दोनों तरफ से तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं। इस विवाद के केंद्र में लेबनान का मुद्दा है, जिसने इस पूरे कूटनीतिक घटनाक्रम को संदिग्ध बना दिया है।
शहबाज शरीफ के दावों की खुली पोल और कूटनीतिक फजीहत
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया था कि अमेरिका, ईरान और उसके सहयोगी देशों ने दो हफ्ते के लिए हमलों को रोकने (Temporary Truce) और शांति वार्ता पर सहमति जताई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से लेबनान को भी इस समझौते का हिस्सा बताया था। हालांकि, अमेरिकी व्हाइट हाउस ने तत्काल प्रभाव से इस दावे को खारिज कर दिया। अमेरिका का कहना है कि लेबनान कभी भी इस द्विपक्षीय युद्धविराम (Bilateral Ceasefire) का हिस्सा नहीं था और इसकी जानकारी सभी पक्षों को पहले ही दी जा चुकी थी।
लेबनान में जारी हिंसा और ‘स्ट्रेट ऑफ होरमुज’ पर बढ़ा तनाव
युद्धविराम की घोषणा के बावजूद इजरायल द्वारा लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर की जा रही लगातार बमबारी (Airstrikes in Lebanon) ने आग में घी का काम किया है। इसके विरोध में ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्ट्रेट ऑफ होरमुज (Strait of Hormuz) को फिर से बंद करने का संकेत दिया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शहबाज शरीफ की पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए अमेरिका से सवाल किया कि वह वास्तव में शांति चाहता है या इजरायल के जरिए युद्ध को जारी रखना चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति और हिंसा दोनों एक साथ नहीं चल सकते।
इजरायल और व्हाइट हाउस का संयुक्त रुख: लेबनान समझौते से बाहर
ईरान के दबाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया कि ईरान-अमेरिका सीजफायर डील में लेबनान को शामिल नहीं किया गया है। नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रहेगा। इसी सुर में सुर मिलाते हुए व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने भी पुष्टि की कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का दावा तथ्यों से परे था और युद्धविराम की शर्तों (Terms of Ceasefire) में लेबनान का कोई जिक्र नहीं था।
क्या पाकिस्तान ने ईरान को गुमराह किया या अमेरिका ने तोड़ा वादा?
इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान की वैश्विक साख पर बड़े सवाल (Major Diplomatic Questions) खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या शहबाज शरीफ ने ईरान को जानबूझकर गलत जानकारी दी या फिर अमेरिका ने अंतिम समय पर समझौते की शर्तों में बदलाव कर विश्वासघात (Betrayal in Diplomacy) किया? यदि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं था, तो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने आधिकारिक तौर पर इसका जिक्र क्यों किया, यह एक गंभीर गुत्थी बन गई है।
ईरान के स्पीकर का कड़ा बयान: ‘अमेरिका पर अविश्वास का इतिहास’
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि बातचीत शुरू होने से पहले ही शांति प्रस्ताव के तीन बिंदुओं (Three Violations of Proposals) का उल्लंघन किया जा चुका है। गालिबाफ ने दावा किया कि लेबनान में सीजफायर न होना, ईरान में ड्रोन हमले की कोशिश और ईरान के यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को मानने से इनकार करना यह साबित करता है कि अमेरिका अपने वादों पर टिकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे में द्विपक्षीय बातचीत का अब कोई ठोस औचित्य (No Justification for Talks) नहीं रह जाता है।

