Maulana Abdullah Salim: उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार के पूर्णिया जिले से चर्चित इस्लामी वक्ता अब्दुल्ला सलीम कमर चतुर्वेदी कासमी को गिरफ्तार कर लिया है। अररिया जिले के जोकीहाट निवासी मौलाना अब्दुल्ला पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माता के खिलाफ अत्यंत आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणी करने का आरोप है। पूर्णिया के अमौर दलमारपुर थाना क्षेत्र में स्थानीय पुलिस के सहयोग से की गई इस गिरफ्तारी के बाद आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर उत्तर प्रदेश ले जाया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल विवादित टिप्पणी और भड़काऊ भाषण
विवाद की जड़ में मौलाना अब्दुल्ला सलीम का वह सोशल मीडिया वीडियो है, जिसमें वे उत्तर प्रदेश में गौकशी के खिलाफ लागू सख्त कानूनों की तीखी आलोचना कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने मर्यादा की सीमाएं लांघते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माता को लेकर अपशब्द कहे। उन्होंने भड़काऊ अंदाज में कहा था कि प्रदेश में ऐसे कानून हैं कि यदि किसी के पास मुख्यमंत्री की मां का मांस भी मिल जाए, तो पुलिस एनकाउंटर कर देती है या पैरों में गोली मार देती है। इस बयान के बाद हिंदू संगठनों और आम जनता में व्यापक आक्रोश फैल गया था।
यूपी के 84 थानों में कानूनी कार्रवाई और पुलिसिया शिकंजा
मौलाना के इस आपत्तिजनक बयान का असर पूरे उत्तर प्रदेश में देखने को मिला। आरोपी के खिलाफ प्रदेश के विभिन्न जिलों के लगभग 84 थानों में आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। गौमाता और मुख्यमंत्री की माता के अपमान को लेकर दर्ज इन प्राथमिकियों के बाद यूपी पुलिस लगातार मौलाना की तलाश कर रही थी। अंततः सटीक सूचना के आधार पर एसटीएफ ने बिहार में दबिश देकर उन्हें हिरासत में लिया। अब उन्हें यूपी लाकर इन सभी मामलों में पूछताछ और न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा।
बिहार से उत्तर प्रदेश के लिए ट्रांजिट और सुरक्षा इंतजाम
गिरफ्तारी के बाद पूर्णिया में कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी की गई। कड़े सुरक्षा घेरे के बीच मौलाना अब्दुल्ला को ट्रांजिट रिमांड पर उत्तर प्रदेश पुलिस को सौंपा गया। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के मद्देनजर बिहार और उत्तर प्रदेश, दोनों राज्यों की पुलिस अलर्ट मोड पर है। पुलिस को अंदेशा है कि इस कार्रवाई के बाद संवेदनशील इलाकों में तनाव पैदा हो सकता है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को बेहद पुख्ता कर दिया गया है।
मौलाना का शैक्षिक सफर और राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं
अब्दुल्ला सलीम कमर चतुर्वेदी कासमी कोई साधारण वक्ता नहीं हैं; उन्होंने प्रसिद्ध इस्लामिक संस्थान दारुल उलूम देवबंद से शिक्षा ग्रहण की है। उनके नाम के साथ ‘चतुर्वेदी’ इसलिए जुड़ा है क्योंकि वे संस्कृत व्याकरण और हिंदू शास्त्रों का भी ज्ञान रखने का दावा करते हैं। राजनीति में भी उनकी गहरी पैठ रही है। पहले वे असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के सक्रिय सदस्य थे, लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने पाला बदल लिया और प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ पार्टी में शामिल हो गए।
निर्वाचन आयोग की कार्रवाई और राजनीतिक भविष्य पर संकट
राजनीतिक गलियारों में भी मौलाना की गिरफ्तारी की चर्चा तेज है। उन्होंने हालिया चुनावों के लिए अपना नामांकन पत्र भी दाखिल किया था, लेकिन तकनीकी आधार पर निर्वाचन आयोग ने उनका पर्चा खारिज कर दिया था। अब 84 आपराधिक मामलों और इस ताजा गिरफ्तारी ने उनके राजनीतिक भविष्य पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं। यूपी एसटीएफ की इस कार्रवाई को नफरती भाषणों (Hate Speech) के खिलाफ एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

