Parliament Session: भारतीय संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर, विपक्षी दलों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में जोरदार चर्चा शुरू हो गई है। इस ऐतिहासिक बहस के लिए कुल 9 घंटे का समय आवंटित किया गया है। सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने स्पीकर के खिलाफ आधिकारिक संकल्प प्रस्तुत किया, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है।
विपक्ष का प्रहार
चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने स्पीकर की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि यह संभवतः पहली बार है जब नेता प्रतिपक्ष (LoP) को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित ‘कॉम्प्रोमाइज’ (समझौते) के मुद्दों को सदन के पटल पर उठाया, तो उन्हें बीच में ही रोक दिया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद किसी एक विचारधारा या पार्टी की जागीर नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक अभिव्यक्ति का मंच है।
सत्तारूढ़ दल का पलटवार
सदन के भीतर माहौल तब और गरमा गया जब बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। दोनों नेताओं के बीच ‘हॉट टॉक’ (तल्ख बहस) देखने को मिली। जहां विपक्ष स्पीकर पर पक्षपात का आरोप लगा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष का तर्क है कि सदन नियमों और मर्यादाओं से चलता है। राहुल गांधी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि उनके बारे में सदन में “अजीब बातें” कही जा रही हैं और जब भी विपक्ष जनता के बुनियादी सवाल उठाता है, तो माइक बंद कर दिया जाता है या बोलने से रोक दिया जाता है।
नए समीकरण और प्रस्ताव
इस अविश्वास प्रस्ताव के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) ने एक नया दांव खेला है। सपा सांसद आनंद भदौरिया ने लोकसभा अध्यक्ष के पद के लिए अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद का नाम प्रस्तावित कर सियासी हलचल बढ़ा दी है। वहीं, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने चर्चा के दौरान ‘एपस्टीन फाइल’ और ‘भारत-अमेरिका व्यापार समझौते’ जैसे संवेदनशील मुद्दों को फिर से उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश की। विपक्ष का तर्क है कि वर्तमान अध्यक्ष के रहते इन महत्वपूर्ण विषयों पर निष्पक्ष चर्चा संभव नहीं है।
सरकारी रुख पर कटाक्ष
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने सत्ता पक्ष की भाषा और व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार का पूरा ध्यान अध्यक्ष को बचाने के बजाय नेता प्रतिपक्ष पर हमला करने में है। उन्होंने सदन में कहा, “ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ नहीं, बल्कि विपक्ष के नेता के खिलाफ लाया गया है।” अनवर के अनुसार, सत्ता पक्ष की घबराहट इस बात से साफ झलकती है कि वे बार-बार राहुल गांधी को निशाना बना रहे हैं, जो स्पष्ट करता है कि सरकार विपक्ष की एकजुटता से दबाव में है।

