West Asia Crisis: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में पैदा हुए व्यवधानों के बीच केंद्र सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने प्रमुख पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात पर लगने वाले बुनियादी सीमा शुल्क (Basic Customs Duty) को पूरी तरह माफ करने का निर्णय लिया है। यह विशेष छूट 30 जून, 2026 तक प्रभावी रहेगी, जिससे घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
कच्चे माल की लागत घटाने के लिए आयात शुल्क में भारी कटौती
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता और ग्लोबल सप्लाई चेन में आई रुकावटों को देखते हुए यह राहत दी गई है। इस ऐतिहासिक निर्णय से प्लास्टिक, कपड़ा (Textile), फार्मास्युटिकल, पैकेजिंग और ऑटोमोटिव जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सीधा लाभ होगा। सरकार का मानना है कि पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक पर शुल्क माफी से इनपुट लागत में कमी आएगी, जिससे बाजार में अंतिम उत्पादों की कीमतें प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी और आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ कम होगा।
ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण और एक्साइज ड्यूटी में राहत का प्रभाव
ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में सरकार ने पहले ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में 10-10 रुपये की कटौती की थी। हालांकि, एक तरफ जहाँ वाहन ईंधन के मोर्चे पर राहत है, वहीं दूसरी ओर एलपीजी (LPG) उपभोक्ताओं के लिए चुनौतियां बढ़ी हैं। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपये की वृद्धि और कमर्शियल गैस सिलेंडरों के दामों में लगातार तीन बार हुई बढ़ोतरी ने छोटे व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार का यह नया फैसला इन बढ़ती कीमतों के बीच औद्योगिक संतुलन बनाए रखने की एक कोशिश है।
डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग और घरेलू उद्योग के लिए रणनीतिक प्रोत्साहन
सरकार की इस पहल के दायरे में अमोनियम नाइट्रेट, पॉलिएस्टर रेजिन, मेथनॉल और एसिटिक एसिड जैसे महत्वपूर्ण रासायनिक उत्पाद शामिल हैं। इस छूट का मुख्य उद्देश्य घरेलू विनिर्माण उद्योग (Domestic Industry) के लिए कच्चे माल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है। स्टाइरीन, टोल्यून और फिनोल फॉर्मेल्डिहाइड जैसे रसायनों पर निर्भर रहने वाले डाउनस्ट्रीम सेक्टरों पर लागत का दबाव कम होगा, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को वैश्विक संकट के समय में भी गति मिलेगी।
कमर्शियल एलपीजी वितरण के नए कड़े नियम और गैस आपूर्ति की सुरक्षा
वैश्विक गैस संकट और ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली आपूर्ति में बाधा की आशंका को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया है। 1 अप्रैल 2026 से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के वितरण के लिए नए केवाईसी (KYC) और ‘उपयोग घोषणा’ नियम अनिवार्य कर दिए गए हैं। इन नए कड़े दिशानिर्देशों का उद्देश्य कालाबाजारी को जड़ से खत्म करना और अस्पताल, जेल व सुरक्षा बलों जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए गैस की निर्बाध आपूर्ति को प्राथमिकता देना है। सरकार इन पारदर्शी नियमों के जरिए सीमित संसाधनों का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित कर रही है।

