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जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका पहुंचे प्रधानमंत्री, कई द्विपक्षीय मुलाकातों की संभावना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग पहुंच चुके हैं, जहां उनका भव्य और पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री जैसे ही वाटरलूफ एयर फोर्स बेस पर पहुंचे, दक्षिण अफ्रीकी सम्मान-दल ने औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया, जिसमें सैन्य परंपराओं और सांस्कृतिक आतिथ्य का खास प्रदर्शन देखने को मिला। मोदी की इस यात्रा को वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह अवसर भारत की G-20 अध्यक्षता के दौरान आयोजित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बैठकों में से एक है।

अफ्रीका में पहली बार आयोजित हो रहा G-20 शिखर सम्मेलन

इस बार का जी-20 शिखर सम्मेलन कई कारणों से ऐतिहासिक है। सबसे बड़ा कारण यह है कि पहली बार अफ्रीकी महाद्वीप में इस वैश्विक मंच की मेजबानी की जा रही है। दक्षिण अफ्रीका ने एक ऐसे समय में सम्मेलन आयोजित किया है जब पूरी दुनिया आर्थिक स्थिरता, वैश्विक विकास, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श कर रही है।

भारत की अध्यक्षता में जी-20 के कार्यकाल के दौरान अफ्रीकी संघ (African Union) को स्थायी सदस्यता दी गई थी। यह कदम भारत की “ग्लोबल साउथ” की आवाज को मजबूती देने और विकासशील देशों के हितों को प्राथमिकता देने का प्रतीक माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार यह स्पष्ट किया है कि वैश्विक निर्णय-प्रक्रियाओं में अफ्रीकी देशों की सक्रिय भागीदारी बेहद आवश्यक है।

पीएम मोदी की संभावित द्विपक्षीय मुलाकातें

शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कई राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकों की संभावना है। इन मुलाकातों में व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग, सुरक्षा, रक्षा साझेदारी, ऊर्जा और शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। विशेष रूप से भारत-अफ्रीका संबंधों को नई दिशा देने के लिए यह यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, सऊदी अरब, यूरोपीय संघ, अमेरिका और जापान जैसे कई प्रमुख देशों के नेताओं से मुलाकात की संभावना को लेकर भी उत्सुकता बनी हुई है। भारत की वैश्विक भूमिका को देखते हुए कई देश बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के प्रति उत्साहित हैं।

भारत की भूमिका और वैश्विक अपेक्षाएँ

पिछले कुछ वर्षों में भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका काफी मजबूत हुई है। कोविड-19 महामारी के दौरान वैक्सीन मैत्री अभियान, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, हरित ऊर्जा की दिशा में प्रयास और जी-20 मंच पर विकासशील देशों की आवाज उठाने से भारत ने वैश्विक मंच पर नई छवि बनाई है। इस पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था, जलवायु संरक्षण, हरित विकास, तकनीकी प्रगति और शांति-सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भारत के विचार शिखर सम्मेलन में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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