Middle East War: मध्य पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच गहराता तनाव अब वैश्विक सीमाओं को लांघकर भारत की दहलीज तक पहुँच गया है। युद्ध की इस विभीषिका के बीच, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को लेकर मोर्चा संभाल लिया है। आज यानी बुधवार, 25 मार्च 2026 को शाम 5 बजे संसद भवन में एक महत्वपूर्ण ‘सर्वदलीय बैठक’ आयोजित की गई है, ताकि इस अंतरराष्ट्रीय संकट पर राष्ट्रीय सहमति बनाई जा सके।
वैश्विक युद्ध का भारतीय अर्थव्यवस्था और महंगाई पर संभावित प्रभाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं संसद के दोनों सदनों में स्वीकार किया है कि स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) के लिए मध्य पूर्व के देशों पर अत्यधिक निर्भर है। यदि यह संघर्ष और भीषण होता है, तो कच्चे तेल (Crude Oil) और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति शृंखला बाधित हो सकती है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ता तनाव वैश्विक व्यापार के लिए काल बन सकता है, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ने से आम आदमी की रसोई और परिवहन लागत में भारी उछाल आने की आशंका है।
विपक्ष का रुख: राहुल गांधी की बैठक से दूरी और विदेश नीति पर तीखे प्रहार
इस महत्वपूर्ण रणनीतिक चर्चा के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम यह है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने केरल में अपने पूर्व-निर्धारित कार्यक्रमों का हवाला देते हुए बैठक से दूरी बनाई है। हालांकि, अनुपस्थिति से पहले ही उन्होंने सरकार की कूटनीति और विदेश नीति (Foreign Policy) पर कड़ा हमला बोला है। गांधी ने आरोप लगाया कि वर्तमान नीतियां केवल प्रधानमंत्री की ‘व्यक्तिगत पसंद’ बनकर रह गई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति कमजोर हो रही है।
सरकार की युद्धकालीन तैयारी: 7 एम्पावर्ड ग्रुप्स और ‘प्लान बी’ का खाका
हालात की गंभीरता को देखते हुए मोदी सरकार ने अपनी आपातकालीन रणनीति (Contingency Plan) साझा की है। पीएम मोदी ने सदन को आश्वस्त किया कि स्थिति की निगरानी के लिए 7 विशेष एम्पावर्ड ग्रुप (Empowered Groups) गठित किए गए हैं। इन समूहों का प्राथमिक कार्य देश में एलपीजी, कच्चे तेल और उर्वरकों (Fertilizers) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है। सरकार का ‘प्लान बी’ केवल आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और उनकी सुरक्षित घर वापसी भी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और भविष्य की रणनीति पर सर्वदलीय विमर्श
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक यह तय करेगी कि भारत इस वैश्विक भू-राजनीतिक कुरुक्षेत्र (Geopolitical Crisis) में खुद को कहाँ खड़ा करता है। सरकार का मुख्य उद्देश्य विपक्षी दलों को विश्वास में लेकर एक ऐसी ठोस नीति तैयार करना है, जिससे देश के आर्थिक हितों की रक्षा हो सके। आरजेडी सांसद मीसा भारती सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे सरकार द्वारा दी जाने वाली आधिकारिक जानकारी और सुरक्षा ब्रीफिंग का इंतज़ार कर रहे हैं, जिसके बाद ही विपक्ष अपनी साझा रणनीति का खुलासा करेगा।

