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Rudraprayag Earthquake: रुद्रप्रयाग में 5.02 तीव्रता का भूकंप, उत्तराखंड से महाराष्ट्र तक कांपी धरती, दहशत में लोग

Rudraprayag Earthquake: शनिवार की सुबह उत्तर भारत से लेकर पश्चिम भारत तक भूकंप के झटकों ने लोगों को नींद से जगा दिया। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में जहां तेज झटके महसूस किए गए, वहीं महाराष्ट्र के कई जिलों में भी धरती हिलने से लोग घरों से बाहर निकल आए। प्रशासन फिलहाल नुकसान का आकलन कर रहा है।

उत्तराखंड में कुदरत का कोहराम

शनिवार सुबह 5:13 बजे जब लोग गहरी नींद में थे, तब उत्तराखंड का रुद्रप्रयाग जिला भूकंप के झटकों से दहल उठा। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता $5.02$ मापी गई। भूकंप का केंद्र मुख्य शहर से 10 किलोमीटर पूर्व में जमीन से 15 किलोमीटर नीचे स्थित था। करीब 10 से 15 सेकंड तक महसूस किए गए इन झटकों के कारण लोग चीखते-चिल्लाते अपने घरों से सुरक्षित मैदानों की ओर भागे। हालांकि, राहत की बात यह रही कि अब तक किसी बड़े जानमाल के नुकसान की खबर नहीं मिली है।

महाराष्ट्र के कई जिलों में कंपन

उत्तराखंड के अलावा पश्चिम भारत के महाराष्ट्र में भी भूकंपीय हलचल देखी गई। सुबह करीब 8:46 बजे परभणी, नांदेड़, हिंगोली, वाशिम और यवतमाल जिलों में धरती कांपी। हालांकि यहां तीव्रता कम थी, लेकिन कई इलाकों में मकानों की दीवारों में दरारें आने और छतों की टिन की चादरें खिसकने की खबरें सामने आई हैं। अचानक आए इन झटकों ने स्थानीय निवासियों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे लोग काफी समय तक घरों के अंदर जाने से कतराते रहे।

क्यों कांपती है धरती?

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो भूकंप आने के कारण (Causes of Earthquake) पृथ्वी के भीतर छिपी टेक्टोनिक प्लेट्स की निरंतर गतिशीलता में निहित हैं। ये प्लेट्स जब आपस में टकराती हैं या रगड़ खाती हैं, तो उस क्षेत्र (फॉल्ट लाइन) पर भारी दबाव बन जाता है। जब यह संचित दबाव अचानक रिलीज होता है, तो ऊर्जा तरंगों के रूप में बाहर निकलती है, जिसे हम भूकंप कहते हैं। हिमालयी क्षेत्र विशेष रूप से संवेदनशील फॉल्ट लाइनों पर स्थित है, जिसके कारण उत्तराखंड में अक्सर ऐसे झटके महसूस होते हैं।

रिक्टर स्केल और एपिसेंटर

भूकंप की भयावहता को समझने के लिए एपिसेंटर (Epicenter) और रिक्टर स्केल का ज्ञान होना आवश्यक है। एपिसेंटर वह बिंदु होता है जहां सतह पर सबसे पहले कंपन महसूस होता है और नुकसान की संभावना सबसे अधिक होती है। रिक्टर स्केल पर $1$ से $9$ तक की रीडिंग होती है। यदि तीव्रता $7$ से ऊपर चली जाए, तो यह विनाशकारी साबित हो सकती है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि हालांकि आज के झटके मध्यम श्रेणी के थे, लेकिन सुरक्षा मानकों का पालन करना और भूकंप रोधी निर्माण करना ही बचाव का एकमात्र रास्ता है।

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