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Rupali Chakankar Resignation

Rupali Chakankar Resignation: रुपाली चाकणकर ने महिला आयोग के बाद अब NCP प्रदेश अध्यक्ष पद भी छोड़ा

Rupali Chakankar Resignation: नासिक के चर्चित ‘भोंदू बाबा’ अशोक खरात मामले में फंसीं रुपाली चाकणकर की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राज्य महिला आयोग के शीर्ष पद से विदाई के बाद अब उन्होंने पार्टी के भीतर अपनी संगठनात्मक जिम्मेदारी से भी त्यागपत्र दे दिया है।

अशोक खरात विवाद और चाकणकर का दोहरा इस्तीफा

महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल लाने वाले नासिक के स्वघोषित बाबा अशोक खरात के सेक्स स्कैंडल ने अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की कद्दावर नेता रुपाली चाकणकर के राजनीतिक करियर पर विराम लगा दिया है। अशोक खरात को अपना आध्यात्मिक गुरु मानने वाली चाकणकर पर पिछले कई दिनों से नैतिक आधार पर पद छोड़ने का भारी दबाव था। राज्य महिला आयोग की अध्यक्षता से हटने के ठीक बाद, शुक्रवार को उन्होंने NCP महिला प्रदेश अध्यक्ष के पद से भी अपना इस्तीफा सौंप दिया।

निष्पक्ष जांच हेतु संगठनात्मक पद का परित्याग

रुपाली चाकणकर ने अपना इस्तीफा पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्य की उप-मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को भेजा है। अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण की पारदर्शिता और निष्पक्ष कानूनी जांच सुनिश्चित करने के लिए वह स्वेच्छा से पद छोड़ रही हैं। चाकणकर ने इस बात पर जोर दिया कि पद पर रहते हुए जांच प्रभावित होने के आरोपों से बचने के लिए उन्होंने यह कड़ा कदम उठाया है।

वित्तीय लेन-देन और कुकर्मों के आरोपों पर सफाई

अपने आधिकारिक बयान में चाकणकर ने बाबा अशोक खरात के साथ किसी भी प्रकार की व्यावसायिक या आपराधिक सांठगांठ से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा, “खरात के वित्तीय व्यवहार या उनके अनैतिक कृत्यों में मेरी कोई भागीदारी नहीं है। मेरा रुख पहले दिन से स्पष्ट है और आज भी मैं उसी पर कायम हूँ।” उन्होंने मीडिया ट्रायल पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के निराधार आरोप लगाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और सच जल्द ही जांच के माध्यम से सामने आएगा।

सीएम देवेंद्र फडणवीस के कड़े रुख के बाद पदमुक्ति

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे सेक्स स्कैंडल मामले में रुपाली चाकणकर का नाम आने से महायुति सरकार की छवि धूमिल हो रही थी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए सख्त रुख अख्तियार किया। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद ही चाकणकर को पहले राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से हाथ धोना पड़ा। सरकार की साख बचाने के लिए सीएम ने स्पष्ट संकेत दे दिए थे कि किसी भी दागी नेता को संवैधानिक पदों पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री से मुलाकात और स्पष्टीकरण का प्रयास विफल

इस्तीफा देने से पूर्व रुपाली चाकणकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भेंट कर अपना पक्ष रखने और सफाई देने की कोशिश की थी। हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस संवेदनशील मामले में उनकी दलीलों को सुनने में कोई रुचि नहीं दिखाई। बताया जा रहा है कि सीएम ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को पहले ही संदेश दे दिया था कि सरकार की बदनामी करने वाले किसी भी कृत्य को वह हल्के में नहीं लेंगे। अंततः, चौतरफा दबाव के चलते चाकणकर को अपने दोनों महत्वपूर्ण पदों से मुक्त होना पड़ा।

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