West Bengal Assembly Election 2026: बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) सुवेंदु अधिकारी ने ममता सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। अधिकारी ने दावा किया है कि राज्य का पुलिस तंत्र राजनीतिक दबाव के तहत काम कर रहा है और भाजपा नेताओं को दल-बदल के लिए मजबूर कर रहा है।
प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग और सत्ता पक्ष के हस्तक्षेप का आरोप
सुवेंदु अधिकारी ने अपने गृह जिले पूर्वी मिदनापुर में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग चरम पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले के प्रभारी अधिकारी सीधे तौर पर भाजपा के प्रमुख चेहरों को निशाना बना रहे हैं। अधिकारी के अनुसार, यह पूरी कवायद विपक्षी दल को कमजोर करने और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए की जा रही है।
महिषादल पुलिस स्टेशन के अधिकारी की कथित व्हाट्सएप कॉल का विवाद
भाजपा नेता ने मीडिया को संबोधित करते हुए एक विशिष्ट घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जिस दिन भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की, उसी दिन महिषादल पुलिस स्टेशन के प्रभारी ने भाजपा नेता बिस्वनाथ बनर्जी को व्हाट्सएप कॉल किया। अधिकारी का दावा है कि इस कॉल के जरिए बनर्जी को भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने का “सुझाव” और दबाव दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आचार संहिता (MCC) लागू होने के बावजूद एक वर्दीधारी अधिकारी का ऐसा व्यवहार लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन है।
पुलिस थाने पहुँचकर दी कड़ी चेतावनी
इन घटनाओं से आक्रोशित सुवेंदु अधिकारी स्वयं महिषादल पुलिस स्टेशन पहुँचे। हालाँकि संबंधित अधिकारी वहां उपस्थित नहीं थे, लेकिन उन्होंने ड्यूटी इंचार्ज के माध्यम से अपना कड़ा संदेश भिजवाया। उन्होंने चेतावनी दी कि पुलिस कर्मी सत्ताधारी दल के एजेंट के रूप में काम करना बंद करें। अधिकारी ने साफ किया कि यदि ऐसी हरकतें दोबारा दोहराई गईं, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और इस मामले की आधिकारिक शिकायत भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से करेंगे।
वीडियो साक्ष्य और निर्वाचन आयोग के नियमों के उल्लंघन का दावा
विपक्ष के नेता ने केवल मौखिक आरोप ही नहीं लगाए, बल्कि यह भी दावा किया कि उनके पास इन घटनाओं के पुख्ता वीडियो सबूत मौजूद हैं। उन्होंने तामलुक के उपमंडल पुलिस अधिकारी (SDPO) का उदाहरण देते हुए कहा कि स्थानीय नेताओं को दफ्तर बुलाकर निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए उकसाया जा रहा है। उन्होंने सरकारी कर्मियों और नागरिक स्वयंसेवकों को आगाह किया कि उनका वेतन जनता के टैक्स से आता है, न कि किसी विशेष राजनीतिक दल की तिजोरी से। उन्होंने कर्मियों को अपना भविष्य और करियर दांव पर न लगाने की सलाह दी।

